दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
आज से कुछ महीनों पूर्व जोबट विधानसभा क्षेत्र के बेहडवा के वेयर हाउस से आम नागरिकों को फ्री में बांटने वाला राशन जिसमे गेहूं अवेध रूप से कालाबाजारी करने के लिए रात में वेयर हाउस से भरकर रात के अंधेरे में ले जाते समाज एक जोबट माफिया गैंग आम्बुआ पेट्रोल पंप पर खड़े वाहनों की अलीराजपुर एसडीएम के द्वारा जांच करने के बाद सारा राशन वेयरहाउस से ही भरकर ले जाना ट्रक ड्राइवर ने कुबूल किया किया जिसके बाद जिला प्रशासन ने कई अधिकारी और संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी लेकिन ड्राइवर को पुलिस के हाथों से भागकर सारे आरोपियों को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत के बाद आज वो जिले का गेहूं कांड कागजों में ही दब गया और पूरे जिले के लोगो को पता है कि उसने किस किस ने रेवड़ियां बटोरकर आज उस कांड को गुमनामी के अंधेरों में खो दिया ओर आज वही गैंग अब फिर से आदिवासी बहुल जिलों में ऑर्गेनिक कपास की शासन के द्वारा खरीदी दिन प्रतिदिन कागजों में बढ़ती जा रही है

अभी कुछ दिनों पहले अलीराजपुर जिले कि एक मात्र जोबट कि कटान मिल पर कलेक्टर अरविंद बड़ेकर ने दौरा किया ऑर्गेनिक कॉटन खरीदने वालों ने अपना स्टाइल लगाकर अपनी उपलब्धि कलेक्टर महोदय को बताई ओर वह भी प्रभावित हुए की इतना ऑर्गेनिक कॉटन हमारे यहां हो रहा है उसके बाद हमारे द्वारा ऑर्गेनिक खेती करने वाले कृषक से उनके खेतों मे जाकर मिले तो पता चला इस जिले में कृषक के नाम पर हुआ सबसे बड़ा घोटाला है जिनके नाम ऑर्गेनिक खेती करने वाले के 49 वे नंबर पर हे लिमसिंग नानू, वही 93 नंबर के सेकड़िया सुरसिंग आदि लगभग 500 कृषकों ऑर्गेनिक कपास मंडी में देना बताया जा रहा है और जब गांवों में जाकर देखा तो अधिकांश तह ऑर्गेनिक खेती करने के नाम पर जो कृषक दर्ज है, वह रासायनिक व पेस्ट्रीशाईट खाद और दावाओ का उपयोग करते हुए खेती कर रहे है और अपने ही गांव एवं आसपास के व्यापारियों को अपना कपास बेच रहे है और मंडी यह दावा कर रही है

कि कृषक मंडी में अपना कपास ला रहे है जबकि सच्चाई यह है कि कॉटन व्यापारी का ओर आसा संस्था व द चैन मेकर चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा एक गठजोड़ चुनिंदा व्यापारिक का है जो अधिकारियों और जनप्रतिनिधि के संरक्षण में रासायनिक कपास को ऑर्गेनिक कॉटन बताकर शासन को बेवकूफ बनाया जा रहा है कागज कि खाना पूर्ति करने के लिए कृषक को बोनस के नाम पर कुछ रुपया दिया जाता हैं इस जिले का कपास प्रदेश से लगाकर देश एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई किया जा रहा है और कृषक का माल बाजार के भाव से व्यापारियों के द्वारा खरीदा जाता हे और तीन से चार गुना ज्यादा कीमत में विदेश में बेचा जाता है सबसे बड़ी बात यह है कि ऑर्गेनिक कॉटन पूरे क्षेत्र में जिस हिसाब से कागज में बताया जा रहा है नहीं हो रहा।।

अधिकारी कर्मचारी व्यापारी एवं एबिटा का हे गढ़जोड़।।कॉटन की इस पूरे क्षेत्र में सबसे ज्यादा दोषी ऑर्गेनिक खेती के प्रमाणिकता देने वाली शासन कि एजेंसी एबिटा है वह कैसे रासायनिक खातों का ओर दवाइयों का उपयोग करने वाले कपास को ऑर्गेनिक कॉटन का प्रमाण पत्र दे देती है यह भी जांच का विषय है। पूर्वी अधिकारी कैसे ने ऑर्गेनिक की प्रमाणिकता देते हैं यह समझ से परे है यह इस क्षेत्र में कृषक के नाम पर हुआ सबसे बड़ा घोटाले के रूप में देखा जा सकता है और यह भी विचारणीय प्रश्न है कि इतना बड़ा घोटाला हुआ ओर कलेक्टर महोदय के संज्ञान में नहीं है यह समझ से परे है या उनकी अधीनस्थ कर्मचारी में उन्हें गुमराह कर रहे है और कृषकों के साथ इतना बड़ा घोटाला तभी हो सकता है जब स्थानीय कर्मचारी से लेकर उच्च अधिकारी तक और स्थानीय जनप्रतिनिधि सामाजिक संगठन के जिम्मेदार का आपस में गठबंधन मजबूत हो।। आज सफेद सोने की खेती को ऑर्गेनिक खेती का कपास कहकर खरीदकर कर महंगे भाव में बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया जा रहा है साथ ही देश के ओर जोबट के क्षेत्र गरीब आदिवासी किसानों को खुल्ले आम धोखा दिया जा रहा है जैसे फ्री का गेहूं बेचकर रुपया कमाया जा रहा था वैसे ही आज दोबारा वहीं गैंग सक्रिय है ।।जिन्होंने गेहूं की जगह कपास की कालाबाजारी करना चालू कर दिया लोग वहीं है जिनकी आज भी आदत नहीं बदली ।