परिवेश पटेल
खरीब की फसलों की बिजाई का सीजन शुरू हो चुका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसान गेहुँ,चना के लिए समय उपयुक्त है। लेकिन नहरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं होने के चलते किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सिंचाई के लिए नहरी पानी नहीं मिलने , जो किसानों को महंगा पड़ रहा है। माही परियोजना माही नहर किनाल नंबर दो रायपुरिया,रूपगढ़ कोदली,उन्नई के लिए जो जोकि शेड्यूल के हिसाब से 25 नवंबर बताई गई थी मगर 25 नवंबर नहीं खोली गई नहर किसानों का कहना है कि नवंबर माह बीतने वाला है और अभी तक नहर का पानी नहीं छोड़ा गया है किसानों को फिर आखरी में भी पानी की समस्या होती है मगर माही परियोजना के अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। सरकार कहती है कि किसानों की दोगुनी आयात कर देंगे। इस वर्ष तो किसानों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है जो सरकार द्वारा निर्मित किया गया था सोयाबीन खरीदी का उसमें भी किसानों की खरीदारी नहीं हो रही कोई नमी बता रहा है। किसानों का कहना है कि नवंबर माह बीत गया मगर अभी माही नहर मेंपानी नहीं छोड़ा गया हमने गेहूं बॉय ने 15 दिन हो गए अधिकारियों को फोन लगाते बस खोल दी खोल दी माही परियोजना नहर जो बनी हुई है वह सब चौकीदारों के भरोसे चल रही है ।
किसान मानसिंग,मानया,पूना,धन्ना,तेजराम,वासु का कहना है कि गेहूं का सीजन खत्म हो चुका है। खेतों लंबे समय से नहरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के अधिकांश किसान सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भर करते हैं। नहरों में पानी नहीं होने के चलते उनके खेत खाली पड़े हैं।किसानों ने खेतों की सिंचाई के लिए सिंचाई विभाग से नहरों में पानी छोड़ने की मांग की।
माही परियोजना के अधिकारी एसडीओ धीरज जामोद को फोन लगाया मगर रिसीव नहीं किया