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इन्दौर कमिश्नर ने पूर्व के कलेक्टरो के जमीन संबंधी त्रूटिपूर्ण आदेशो को किया निरस्त कभी जमींदार थे नही, पर 100 वर्षो से जमींदारी करते आ रहे

सरदारपुर:- सरदापुर क्षेत्र के क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा शनिवार को नगर की 277 बीघा भूमि घोटाले के संबंध मे इन्दौर कमिश्नर दीपकसिंह के नवागत निर्णय से जनता को अवगत करवाया गया। नगर परिषद् कार्यालय मे आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए विधायक प्रताप ग्रेवाल ने बताया कि 4/11/2024 को इन्दौर कमिश्नर ने सरदारपुर नगर की भूमि 277 बीघा के पुराने सभी त्रूटिपूर्ण निर्णयो को निरस्त किया और उपरोक्त जमीन को शासन की मानकर यह निर्णय दिया कि परिवार विशेष सन् 1921 से कभी इस जमीन की जमींदारी को प्राप्त नही कर पाया बल्कि मौरूसी कृषि के पट्टे पर प्राप्त जमीन को ओव्हर राईटिंग कर स्वमेव जमींदार बन बैठा। इन सभी कार्यो मे परिवार विशेष की तत्कालीन पदस्थ कलेक्टर, तहसीलदारो ने सहायता की और अवैधानिक ढंग से परिवार विशेष को नगर की सम्पूर्ण जमीनो का मालिक बना दिया इन सभी निर्णयो को इन्दौर कमिश्नर ने निरस्त किया और नए सिरे से जमीनो की विधिसम्मत निराकरण हेतु निर्णय पारित किया। ज्ञात रहे कि वर्ष 2007 मे धार कलेक्टर ने परिवार विशेष से 11.092 हैक्टेयर भूमि शासन के पक्ष मे त्यजन करवाकर शेष जमीनो को परिवार विशेष के सुपूर्द कर दिया था जिसमे माही नदी, शमशान, कब्रस्तान, सडक के पास पडत एवं खुली भूमि, मंदिर, जेल, फांसी घर, कन्या स्कुल, धर्मशाला आदि भूमिया शामिल थी जिनके रिकार्ड मे हेराफेरी कर इन्है निजी खाते मे दर्ज कर दिया गया था उपरोक्त त्रूटिपूर्ण आदेश को निरस्त कर जमीनो की जांच का नवीन आदेश पारित किया। उपरोक्त जमीने जनहित की शासकीय जमीन थी जिसे परिवार ने अपनी बताकर शासन को त्यजन किया और शासन को गुमराह कर जमीने हथिया ली। निर्णय मे कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार के पूर्वजो ने सन् 1921 मे जमींदारी के लिए आवेदन किया था जिसे शासन द्वारा 25.1.1921 को निरस्त कर दिया गया था। इन्दौर कमिश्नर द्वारा पारित निर्णय मे सन् 1964 के तहसीलदार के आदेश को भी कमिश्नर द्वारा अमान्य पाया गया, दिनांक 30.12.2003 को राजस्व मण्डल ग्वालियर ने 277 बीघा 18 बिस्वा भूमि शासन के स्वामित्व मे दर्ज करने के आदेश प्रदान किए थे जिसके विरूध्द परिवार विशेष ने इन्दौर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया। वर्ष 2007 मे नगर परिषद् सरदारपुर ने अध्यक्ष ब्रजेश ग्रेवाल, पार्षद संजय जायसवाल, मोहन यादव, सुनील गुप्ता, दिनेश परमार, चंदनबाई शांतिलाल सेठिया आदि पार्षदो ने परिषद् की बैठक मे नगर की 277 बीघा भूमि का प्रकरण लडने का प्रस्ताव पारित किया जो इस भूमि घोटाले का मिल का पत्थर सिध्द हो रहा है कमिश्नर इन्दौर ने अपने निर्णय मे यह भी माना कि जमींदारी उन्मूलन कानून 1951 मे लागु होने के बाद जमींदारी समाप्त हो गई किन्तु बडे पैमाने पर भूमियो पर मौरूसी काश्तकार का कब्जा रहना विचारणीय है अधिनियम के अनुसार उपरोक्त जमीने शासन को लोटा देनी चाहिए थी पट्टेदार मौरूसी कृषक बनकर शासकीय भूमिया हस्तगत करने मे सफल रहे जो विधि के अनुकूल नही है। न्यायालय ने कलेक्टर धार को निर्णय दिया कि नगर के भूमि विवाद से संबंधित पुराने कलेक्टरो के निर्णयो को खारिज किया जाए जो भूमिया शासन के नाम है उन्है शासन के नाम रखा जाए और शेष भूमि को उभयपक्षो को सुनकर निराकरण किया जाए। 

ज्ञात रहे कि वर्ष 1994-95 मे नाली निर्माण के विवाद को लेकर स्व. अम्बाराम चोधरी, स्व. लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, स्व. मजहर अली जैदी, पूर्व न.प. अध्यक्ष कैलाश डावर, शांतिलाल सेठिया, संजय जायसवाल द्वारा जिला कलेक्टर को जमीनो की हेराफेरी की शिकायत की गई और माही नदी, शमशान, रास्ते, खेल मैदान, जेल, थाना, मंदिर, स्कुल, धर्मशाला की भूमिया जो कि सार्वजनिक हित की भूमिया है जिन पर किसी व्यक्ति का आधिपत्य हो ही नही सकता है उपरोक्त भूमिया परिवार विशेष के खाते मे दर्ज है कलेक्टर द्वारा स्वयं स्थल निरीक्षण किया गया जिसमे मिल्कियत सरकार का रजिस्टर मिला जिसे जिला मुख्यालय पर अवलोकन हेतु बुलवाया गया। जिला कलेक्टर ने शिकायत की अनदेखी की। वर्ष 2009 मे जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने मामले की जांच कर शासन को अपनी जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया और यह माना कि उपरोक्त भूमिया परिवार विशेष की न होकर शासन की है कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत पट्टे मे काट छाट और ओव्हर राईटिंग हो तो उनकी प्रामाणिकता संदिग्ध हो जाती है क्योकि प्रतिवादियो ने मौरूसी काश्तकार पट्टे की मूल प्रतिया प्रकरण मे कभी भी प्रस्तुत नही की। वर्ष 2019 मे नगर परिषद् सरदारपुर की याचिका पर उच्च न्यायालय इन्दौर द्वारा संभागीय आयुक्त इन्दौर को स्वयं की निगरानी मे जांच कर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए थे इसी तारतम्य मे नगर परिषद् द्वारा जमीन प्रकरण के लिए विधायक प्रताप ग्रेवाल के मार्गदर्शन मे सन् 2023 मे एक समिति का गठन किया गया जिसमे नगर परिषद् अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षद सहित नगर के मोहनलाल यादव, झमकलाल चैधरी, विष्णु पडियार को शामिल किया। विधायक प्रताप ग्रेवाल, नगर परिषद् एवं जमीन प्रकरण समिति के निरंतर प्रयासो से संभागीय आयुक्त इन्दौर द्वारा दिनांक 04/11/2024 को पूर्व कलेक्टरो के सभी त्रूटिपूर्ण आदेशो को खारिज करते हुए शासन की जमीन शासन के नाम करने की दिशा मे एक ठोस कदम उठाने का ऐतिहासिक निर्णय दिया गया। इस प्रकरण मे नगर परिषद् की तरफ से अधिवक्ता जयंत पटवा, गोविन्द पाठक द्वारा पैरवी की गई। प्रेसवार्ता के पश्चात विधायक प्रताप ग्रेवाल जमीन प्रकरण की नीव रखने वाले स्व. अम्बाराम चोधरी (भुतपूर्व जमींदार) के निवास पर पहुचे और उनके चित्र पर माल्यार्पण किया एवं पूर्व पार्षद शांतिलाल सेठिया के निवास पर पहुचकर उनका पुष्पमाला से स्वागत किया। सरदारपुर नगर के महत्वूपर्ण जमीन संबंधी निर्णय पर नगर परिषद्, गोपाल कालोनी, सरदारपुरा चैपाटी, बस स्टैण्ड पर भी आतिशबाजी कर हर्ष व्यक्त किया गया। इस दौरान न.प. अध्यक्ष मिनाक्षी अर्पित ग्रेवाल, उपाध्यक्ष शैलेन्द्र चैहान, पूर्व न.प. अध्यक्ष कैलाश डावर एवं ब्रजेश ग्रेवाल, वरिष्ठ पार्षद संजय जायसवाल, भूमि प्रकरण समिति के मोहन यादव, झमक चोधरी, विष्णु पडियार, पार्षद दिनेश यादव, रेशमा परवेज लोदी, अमरसिंह सोनेर, निरज कटारे, नरेन्द्र पारगी, ज्योति युवराज पंवार, संतोष चोधरी, बलराम यादव, अंसार खान, कालु यादव, कैलाश यादव, मुकेश यादव, लालजु यादव, बगदीराम सिंगार, गोपाल यादव आदि उपस्थित रहे।

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