झाबुआ। जिले की कमान संभालते ही पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए नित नये प्रयास करते आ रहे है और इस आदिवासी बाहुल्य जिले में जागरूकता लाने के नित नये प्रयास कर रहे है। ऐसा नही है कि अपराधों में कमी नही आई… कई जगह बडी बडी वारदातों के खुलासे करने के साथ साथ माफियाओं पर भी शिकंजा कसा है… जनचर्चा है कि एसपी साहब इतना अच्छा कार्य करने के बाद भी उनका नाम बदनाम हो रहे है…. वो भी इसलिए कि आपने महकमें के नीचले स्तर के कर्मचारी रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की इबादत लिखते नजर आ रहे है। अपराधियों की क्या मजाल जो पुलिस पर हाथ उठा दे… पुलिस का नाम सुनते ही अपराधी कांप जाते है… लेकिन यहां हाल कुछ और है… जनचर्चा है कि अपराधियों के बीच ये पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है… क्योकि एसपी साहब के नीचले स्तर के कर्मचारी गांधीछापों के सामने नतमस्त है… जिले के कई थाने और चौकी प्रभारियों के साथ नीचले स्तर के कर्मियों के तबादले करने की नितांत आवश्यकता है…पुलिस अधीक्षक महोदय पुलिस महकमें में जिले के मुखिया आप है… आप तो जिले को अपराध मुक्त करना चाहते है… लेकिन वो कहते है ना एक मछली पुरे तालाब को गंदा करती है… वैसा ही हो रहा है…!
वहीं पुलिस अधीक्षक महोदय दल्ले किस्म के पत्रकारों से भी दुरियां बनाईये… आपके पास बैठ अपनी रोटियां सकते… पहले इनकी दी हुई जानकारियों को खंगालों सही है या गलत… ये दल्ले किस्म में पत्रकार आपके पास से जाने के बाद लोगों को कहते है एसपी साहब की गाडी तो हम रास्ते में भी रोक लेते है… यहां पत्रकार कम दलाल ज्यादा है… आप एक धीर गंभीर पुलिस कप्तान है… सब समझते है… आपको इन दल्ले किस्म के पत्रकारों ने इस तरह बदनाम कर दिया है कि अब एसपी साहब सीधे सेटिंग करते है… और आपके नाम से काले करनामें करते है… ये हम नही कह रहे है एसपी साहब जिले की जनता में जनचर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि थाने चौकियां पर ये दल्ले किस्म के पत्रकार भांजगडी करते नजर आ सकते है। हम तो इस लिए बता रहे है आप जिले के कप्तान हो… आपके आने से बहुत कुछ बदला है… ये जो हमले हो रहे है… आपके अधीनस्थों के कारण हो रहे है… लेकिन बदनाम आप हो रहे हो… अधीनस्थों का क्या… वो तो ठिकरा आप पर फोड देते है… अधीनस्थ भी कमाये… लेकिन जितना वाजिब हो…