झाबुआ। झाबुआ जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला हैं यहां अधिकांष आदिवासी बच्चें शासकीय स्कूलों में अध्ययन करते है। ऐसे शासन भी इस जिले में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए विशेष बजट का आवंटन भी करती है। लेकिन यहां शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले जिम्मेदार भ्रष्टाचार की बानगी लिख रहे है।
मामला है कक्षा 9 से 12 तक खरीदी जाने वाली सांईस किट का… जिसकी आवश्यकता 11वीं व 12वी वाले छात्र-छात्राओं को नितांत आवश्यकता होती है… जिसके लिए एक बजट आवंटित होता है.. जिसमे लैब संबंधित सामग्री जो फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायो के छात्र-छात्राओं को उपयोग में आती है… इस सामग्री के क्रय के लिए स्टॉफ की एक समिति बनती है जिस सामग्री की ज्यादा आवश्यकता होती है उसे क्रय किया जाता है और विज्ञप्ति के माध्यम से कोटेशन भी मंगवाये जाते है… लेकिन झिरी, बालवासा, बोरडी, तलावली, गेहण्डी, बोडायता, कालीघाटी, घुघरी और गुणावद के प्राचार्याे के बाले बाले ऐसा खेल रखा बिल तो बन गए लेकिन सामग्री स्कूलों तक पहुंची नही।
झिरी, बालवासा, बोरडी, तलावली, गेहण्डी, बोडायता, कालीघाटी, घुघरी और गुणावद की हाई स्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों को सांइस किट के लिए शासन की ओर से 1 लाख रूपए आवंटित किए गए थे। लेकिन यहां के प्राचार्याे ने बिना नियम कायदों को ध्यान में रख एक ही दुकान से सांइस किट खरीदने के सामग्री क्रय के कोटेशन भी ले लिए और सामग्री का आर्डर भी कर दिया… सामग्री तो पहुंची नही लेकिन बिल जरूर पहुंच गए और जहां कुछ एक सामग्री पहुंची वो भी घटिया किस्म की सामग्री पहुंची… जो एक दो बार में उपयोग होने पर ही अपनी योग्यता बता देगी…
इस मामले को लेकर हिन्दु जनजाति संगठन के कमलेश जी मावी का कहना है कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए जो राशि शासन द्वारा राशि का आवंटन किया जाता है उस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा के लिए किया जाना चाहिए। ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके। लेकिन कई जगह से जानकारी मिल रही है कि प्राचार्यो और सप्लायरों की सांठगाठ के चलते सामग्री स्कूलों तक पहुंच ही नही पा रही है। झिरी, बालवासा, बोरडी, तलावली, गेहण्डी, बोडायता, कालीघाटी, घुघरी और गुणावद की स्कूलों में प्रषासन को जांच की जानी चाहिए कि इन स्कूलों में साइंस किट पहुंची की नही। अगर नही पहुंची तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और अगर सामान आया है तो जिला कार्यालय से प्राचार्यो द्वारा भौतिक सत्यापन करवाया की नही। क्योकि सप्लायरों द्वारा जो सामग्री सप्लाय की जा रही है वो एकदम घटिया किस्म की की जा रही है। अगर इन स्कूलों में उचित जांच नही की गई तो हिंदू जनजाति संगठन उग्र आंदोलन करेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।