वॉइस ऑफ झाबुआ
बृजेश खंडेलवाल की रिपोर्ट
आम्बूआ:- महिलाएं अपने पुत्रों की लंबी आयु एवं सुखद जीवन के लिए बछ बारस व्रत कर गाय बछड़े की पूजा अर्चना कर करती है! यह त्यौहार हर साल भादो कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है इस दिन मां अपने बेटे की लंबी आयु एवं सुखी जीवन के लिए व्रत रखती है इस पर्व पर महिला एकत्रित होकर गई बछड़े की पूजा करने के लिए स्थानीय शंकरगढ़ प्रांगण स्थित राम मंदिर पर पुजारी शंकर लाल पारीक की उपस्थिति में गाय को नए वस्त्र धारण करवा कर उसकी पूजा करती है

उसके बाद बछ बारस की कथा सुनती है! मान्यता है कि इस दिन महिलाएं गाय का दूध दही एवं चावल जैसे अन्न का सेवन नहीं करती! सभी महिलाएं मंदिर पूजा अर्चना करने के बाद अपने घर पहुंचने पर अपने पुत्रों के हाथ से लड्डू उठाकर उसे प्रसादी के रूप में ग्रहण करवाती है! इस पूजा का पारिवारिक जीवन में बहुत महत्व होता है!