संवाददाता :- सुनील खोड़े
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आपदा को अवसर बनाकर काम करने वाले थांदला बीएमओ की कार्य प्रणाली निश्चित ही संदेह के घेरे में है, थांदला ब्लॉक में लगभग 200 सो से अधिक क्लीनिक आज भी बेख़ौफ़ संचालित हो रहे हैं। जिसे रोक पाने में साहब नाकाम और विफल साबित हो रहे हैं, आखिर क्यों? सभी को छोड़ अचानक परवलिया गांव में कार्यवाही करने जा धमके बीएमओ साहब की कार्यवाही गले उतरने वाली नहीं इस प्रकार की कार्रवाई से तो यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साहब तक कत्था लगा पान पहुंचा नही यदि परवलिया गांव में कार्यवाही करना थी तो एक समान सभी पर होनी थी इसी गांव में ओर भी क्लिनिक संचालित हो रहे हैं। आखिर उन्हें क्यों छोड़ा गया कार्यवाही करना थी तो एक समान करना थी ताकि आरोपो के थपेडे तो साहब पर नहीं पढ़ते हम यह नहीं कह रहे की कार्यवाही क्यों कि हम तो यह कह रहे हैं की कार्यवाही करना थी तो एक समान करना थी इस प्रकार की कार्यवाही बीएमओ साहब पर कई प्रकार के सवाल खड़े कर रही हैं। और तो ओर साहब हंसी के पात्र तो बने ही बने परंतु जन चर्चा का विषय ओर आलोचना का ठीकरा भी साहब ने कार्यवाही करके अपने ऊपर ही फोड़ लिया अब देते रहो आम जनता को जवाब..क्योंकि चोराह पर चर्चा हो रही बे- हिसाब हम बात करे थांदला नगर की तो यहां भी गली मोहल्लो में झोलाछाप डॉक्टर का जमावड़ा हैं आखिरकार इन पर कार्यवाही क्यों नहीं होती, दिया तले अंधेरा जैसी कहावत चरितार्थ करके बीएमओ साहब कर रहे अपने कर्तव्य की इति श्री..