मनीष अरोडा
आलीराजपुर ÷ सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक कानून बनाया ओर उस कानून के तहत हर व्यक्ति को सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओ की जानकारी सार्वजनिक कर उसमे वो अधिकार उस व्यक्ति को दे दिये जिसमे आम इंसान भी विभागो पर अपनी नजर रख सके ओर शासन के द्वारा दी जा रही योजनाओ मे कही भ्रष्टाचार तो हो नही रहा ये जानकारी आरटीआई लगाकर ले सके मगर सरकार की मंशा को आम इंसानो ने कमाई का जरिया बना लिया हर कोई व्यक्ति बिना मतलब के विभागो मे जाकर आरटीआई लगा देता है उसे ये भी नही पता होता है की आरटीआई का कानून क्या है नियम क्या है बस आनलाइन की दूकान पर गये ओर फार्म लिया टिकट चिपकाया ओर विभाग मे पहूच गये लेकर जानकारी मांगने उसे ये नही पता होता है की आरटीआई मे जानकारी कितने दिन मे उपलब्ध हो पायेगी वो व्यक्ति आफिसो के चक्कर काटता रहता है ऐसा अक्सर देखने को मिलता है अलीराजपुर जिला मुख्यालय पर जहा हर दिन कोई ना कोई आरटीआई विभागो मे रोजाना लगती है जिससे अधिकारी कर्मचारी परेशान हो जाते है क्योकी आरटीआई लगाने वाला शख्स जानकारी तो मांगता है लेकिन उस आरटीआई को लगाने के बाद हटाने के एवज मे अपना स्वार्थ भी साधता है जिससे उसकी कमाई हो सके अक्सर ये देखा गया है की विभागो मे आरटीआई लगती तो है लेकिन जानकारी देने के बजाये तीस दिन या उसके बाद जानकारी मागने वाला ही सरेंडर हो जाता है

वो लिखकर दे देता है की मूझे जानकारी की आवश्यकता नही है यहा बडा सवाल यह है की अगर आपको जानकारी की आवश्यकता नही थी तो आपने आरटीआई क्यो लगाई ओर लगाई तो फिर वापस क्यो ली इसका सीधा सा मतलब यह है की जिस मक़सद से आपने आरटीआई लगाई वो मकसद आपका पूरा हो गया ओर उसके बाद आपने वापस से वो आवेदन वापस ले लिया क्या इसी लिए सरकार ने ये कानून आम नागरिक के लिए बनाया की आम नागरिक उसका गलत इस्तेमाल कर सके इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी ओर कलेक्टर साहब को ध्यान देने की जरूरत है आलीराजपुर जिले मे ऐसा हो रहा है