मनीष अरोडा
आलीराजपुर यदि प्रभु राम को वनवास नहीं होता तो रामचरित मानस का निमार्ण नहीं होता। राज्यभिषेक के कारण भगवान राम प्रसन्न नहीं थे। माँ केकई ने भगवान राम को वनवास दिया व भरत का राज्यभिषेक किया। केकई ने राम को वनवास भेजकर राम का त्याग नहीं किया बल्कि भरत का त्याग किया।

उक्त विचार जेथलिया एवं सोमानी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ अमृत वर्षा के छठा दिन चारभुजा धाम राठौड़ समाज भवन में उपस्थित श्रोताओ को प्रवक्ता पूज्य गुरूदेव पण्डित मनोज कयप शेरपुर ने कही। पूर्व में जेथलिया एवं सोमानी परिवार व मेहमानों ने व्यास पीठ का पूजन किया।

आगे पूज्य गुरूदेव कयपजी ने कहां की भगवान राम वनवास जाने के पहले व आने के बाद केकई से मिले जबकि भरत ने मुह भी नहीं मिलाया। माँ की कृपा से लक्ष्मणजी राम के साथ वनवास में साथ रहे। राम समपर्ण है राम की चरण पादुका ने 14 वर्ष तक अयोध्या में शासन किया। इससे आप राम का महत्व समझ सकते है। प्रभु राम का भव्य मन्दिर अयोध्या में 500 वर्ष बाद बना जिससे हमारा जीवन धन्य हो गया।

लोग सनातनी प्रेमी बने सनातनी विरोधी न बने। हर हिन्दुस्तानी को सनातनी बनना रड़ेगा। भागवत पुराण में 18000 श्लोक है। अपना काम स्वयं करें प्रेम निष्फल हैए प्रेम निष्कपट है प्रेम वासना से रहित है मिडिया प्रभारी कृष्णकान्त बेड़िया ने बताया कि जैसे ही पूज्य गुरूदेव मनोज कयप ने पाण्डाल में यह तो प्रेम की बात ही उधो जायेगे ले जायेगे दिल वाली हरण कर ले जायेगे मेरे यार की शादी है भजन गाया तो पुरा पाण्डाल नृत्य व गरबारास से झुम उठा।

जैसे ही कृष्ण भगवान दौड़ते.दौड़ते रूखमणीजी का हरण करके ले गये वह दृय देखते ही बनता था। बाद में कृष्ण रूखमणी विवाह सम्पन्न हुआ। उपस्थित श्रोताओं ने एक दूसरे को बधाई दी। पूरे पाण्डाल में गुलाब के फुल की पंखुडीयों वर्षा हुई। आगे पण्डित जी ने कहां की माँ.बाप की पुरी जिन्दगी औलाद की जिन्दगी ठीक करने में बित जाती है और औलाद शादी के बाद बोलता है कि माँ.बाप अपने बच्चों को भले ही कम पढ़ाये लेकिन संस्कार अच्छे देवें ताकि बेटिया अपने ससुराल में भी माँ.बाप का नाम करे व माँ.बाप एवं सांस.ससुर की सेवा करें।

यह कथा स्वण् वासुदेव चम्पालाल जेथलिया व स्व गोपीकिशन दलीचन्द सोमनी एवं स्व श्रीमती कृष्णादेवी गोपीकिान सोमानी की पावन स्मृति में आयोजित की गई है। मिडिया प्रभारी कृष्णकान्त बेड़िया ने बताया कि रविवार को कथा का अन्तिम दिन है जिसमें सुदामा चरित्र व कथा का विराम होगा। पूणार्होती एवं महाप्रसादी का आयोजन किया गया है। कथा में आलीराजपुर नगर के अलावा बाग जोबट राणापुर इन्दौर छोटा उदयपुर आम्बुआ नानपुर सहित अनेक स्थानों से श्रृद्धालु श्रवण करने आ रहे है। अन्त में महाआरती के साथ प्रसाद का वितरण हुआ।