मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित “उच्च शिक्षा में करियर परामर्श एवं प्रेरकीकरण का महत्व” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का सफलतापूर्वक आयोजन शासकीय आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाबुआ में सम्पन्न हुआ। वेबीनार की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रविंद्र सिंह द्वारा की गई । उन्होंने स्वागत भाषण में वेबिनार की विस्तृत रूपरेखा व इसके उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान चुनौतियों एवं परिवर्तन के दौर में शिक्षा और करियर के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सही मार्गदर्शन एवं प्रेरणा अत्यंत महत्वपूर्ण कारक है। साथ ही बताया कि वेबिनार में देश के 12 प्रदेशों (महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, जम्मू एंड कश्मीर, कर्नाटक, मणिपुर, केरल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दादर नगर हवेली) एवं मध्य प्रदेश के 27 जिलों से 307 प्रतिभागियों ने पंजीयन करवाया और 100 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में जुड़े हुए हैं जिन्हें आदर्श महाविद्यालय का संक्षिप्त परिचय एवं उपलब्धियों के संदर्भ में अवगत कराया गया। यह करियर परामर्श व मोटिवेशन का ही प्रतिफल है कि आज आदर्श महाविद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर महाविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं ।
शहीद चंद्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ जे सी सिन्हा ने कहा कि आदर्श महाविद्यालय प्रतिदिन नई-नई ऊंचाइयों को छू रहा है और निरन्तर ग्रामीण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है।
वेबिनार में राष्ट्र स्तरीय दो मुख्य वक्ताओं को आमंत्रित किया गया था। प्रथम मुख्य वक्ता के रूप में *डॉ. डी. के. वर्मा, डीन, (डॉ भीमराव अंबेडकर समाज विज्ञान विश्वविद्यालय महू) एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समाज विज्ञान समिति के सदस्य रहे । उन्होंने अपने करियर से संबंधित अनुभव साझा करते हुए बताया कि हमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा के भविष्य को समझना बहुत जरूरी होगा। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत क्या विद्यार्थियों के अंदर वह ललक है कि मैं क्यों उच्च शिक्षा के लिए जा रहा हूं? भारत में उच्च शिक्षा में पुश फैक्टर (Push Factor) काम करता है जबकि विदेश में पुल फैक्टर (Pull Factor) काम करता है। पुश फैक्टर वे कारक है जिसके पीछे अवसरों की कमी, रोजगार की आवश्यकता, सामाजिक दवाब, सामाजिक प्रतिष्ठा और कमजोर प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की ओर धकेलती है । उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आंतरिक मोटिवेशन बहुत ज्यादा जरूरी है। उनमें ललक होनी चाहिए कि कहां जाकर पढूं ? क्या पढूं ? उसकी अंदर की इस इच्छा को हम कैसे जगाएं, इस पर हमें सोचना होगा? मोटिवेशन में *पुल फैक्टर को हमें आगे लाना होगा, जिसमें छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आकर्षित किया जा सके। हमें बेहतर शिक्षा संस्थान, प्रतिष्ठित और उच्च मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों की उपलब्धता, स्कॉलरशिप और वित्तीय सहायता, उन्नत पाठ्यक्रम, शोध के अवसर, डिग्री की वैश्विक मान्यता और शैक्षणिक अधिगम संसाधन के अंतर्गत ई-पुस्तकालय, लैब और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म के बेहतर अवसर और उच्च वेतन की संभावनाओं को समाहित करना होगा
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति में नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में पुल फैक्टर ही काम करते थे जिसके कारण विद्यार्थी पूरे विश्व से रुचिपूर्वक वहां अध्ययन के लिए आते थे और उन्हें ऐसी विद्या दी जाती थी जिसमें संस्कार, संस्कृति, मूल्यपरक आचरण एवं कौशल के वो सारे गुण सिखाए जाते थे जिसकी उन्हें जरूरत होती थी। आज हमें सोचना होगा कि निजी कोचिंग संस्थानों की तरह हमें अपने संस्थाओं में भी विद्यार्थियों की मानसिकता के अनुरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझते हुए और उन्हें अधिक सुविधाओं के साथ अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास करने होंगे। डॉ वर्मा ने कहा कि रोजगार उन्मुख शिक्षा को ध्यान में रखकर हमें संस्थाओं और उद्योगों के बीच के अंतराल को कम करना पड़ेगा। हमने कौशल आधारित पाठ्यक्रम बनाकर तो विद्यार्थियों को दे दिए परंतु वह उनमें नहीं जाना चाहते हुए भी उन्हें लेने के लिए उसे बाध्य होना पड़ता है, यह हमारी भी सीमाएं हैं, इस चीज को हमें समझना होगा? इसका समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि आप अधिक से अधिक अपने क्षेत्र में कौशल आधारित कार्य करने वालों से एमओयू करिए जैसे आइआइटी, निजी सिखाने वाले विभिन्न कलाओं में निपुण संगठन जैसे झाबुआ में बाँस का काम करने वाले बहुत सारे संगठन, बाघ पेंटिंग्स आदिवासी गुड़िया बनाना, आदिवासी कलाकृतियों को बनाने वाले कलाकारों की कला आदि विषय विद्यार्थियों को दीजिए जिससे वह इच्छापूर्वक कार्य करेगा और इस क्षेत्र में वे जबरदस्त करियर बना सकते हैं और बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। अंत मे उन्होंने कहा कि करियर काउंसलिंग और मोटिवेशन में सबसे बड़ी बात होती है कि सामने वाले की क्या आवश्यकता है ? उसकी समस्या के निदान के लिए ही परामर्श दिया जाता है । उसके करियर में कहां समस्या आ रही है ? पहले हमें यह समझना होगा । हमारी आदत पड़ गई है कि *हमें जो आता है हम वह उसे देना चाहते हैं और हम यह सोचते हैं कि जो हमने बताया वही सही और पूर्ण है। जबकि पहले हमें उनसे सीखना पड़ेगा कि हमें उन्हें क्या सीखाना है? करियर की उनकी क्या योजना है? पहले समस्या फिर समाधान तो वह रुचिपूर्वक सीखेगा, नहीं तो निष्क्रिय लाभार्थी ही बनेंगे, सक्रिय लाभार्थी नहीं बन पायेंगे क्योंकि आप उनसे सहभागिता ही नहीं कर रहे हैं। हमें संस्थान विद्या देने वाले बनाने होंगें।
वेबिनार में द्वितीय मुख्य वक्ता डॉ मिलिंद महारू पाटिल, प्राध्यापक पीएसजीवीपीएम कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय, शहादा, महाराष्ट्र रहे। इन्होंने बताया कि शिक्षा संवादपरक होनी चाहिए न कि एकलाप के आधार पर, विद्यार्थियों का फीडबैक एकलाप में नहीं मिलता है। करियर काउंसलिंग काउंसलर और विद्यार्थियों के बीच परस्पर वार्तालाप का हिस्सा है जिसका आज अभाव नजर आता है
डॉ पाटिल ने कहा कि करियर को लेकर दोनों में परस्पर शैक्षणिक चर्चाओं की आवश्यकता है, छोटे-छोटे टेस्ट के माध्यम से उनकी मनोवैज्ञानिक व शैक्षणिक अभिरुचि को समझें, उनके करियर के लिए उनके सामाजिक-मनोविज्ञान और छात्र-मनोविज्ञान को समझने की आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे करियर सिलेक्शन के लिए छात्र का आत्म मूल्यांकन व आत्म जागरूक (Self Assessment and Self Aware) होना बहुत जरूरी है अगर हम मुख्य कारक की बात करें तो वह है छात्रों की अपनी रुचियां, क्षमताएं, आजीवन सीखने की निरंतरता, कौशल और मूल्य का मूल्यांकन मुख्य घटक हैं, जिसमें पेशेवर समूह करियर परामर्श के माध्यम से उन्हें लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करता है, इसलिए करियर चयन के क्षेत्र में स्वयं का मूल्यांकन बहुत जरूरी है
काउंसलर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज क्या-क्या अवसर उपलब्ध है? अपने विषय की अधिकतम और अद्यतन जानकारी उनके पास होनी चाहिए, जॉब मार्केट की जानकारी विद्यार्थियों को दें, ताकि वे अपने सामर्थ्य के अनुसार करियर का चयन कर सकें। उन्होंने कहा कि जहां तक निर्णय लेने की बात है तो लक्ष्य को तय करना और उन तक पहुंचने के लिए योजना बनाने और उस योजना में उन विद्यार्थियों की मदद करना, काउंसलिंग एंड गाइडेंस की सबसे बड़ी भूमिका होती है। इसलिए काउंसलर को अच्छी पुस्तकों का निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए, उन्होंने कुछ पुस्तकों के नाम भी बताएं।
इस अवसर पर प्रथम मुख्य वक्ता द्वारा दिए गए व्याख्यान का सारांश शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाबुआ के सहायक प्राध्यापक डॉ. एस के सिकरवार द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं द्वितीय मुख्य वक्ता के व्याख्यान का सारांशीकरण डॉ कपिला बाफना, सहायक प्राध्यापक, शासकीय आदर्श महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालयीन आइक्यूएसी समिति प्रभारी, कार्यक्रम समन्वयक एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ राकेश बघेल, संयोजक डॉ दिलीप परसेंडिया,सहायक प्राध्यापक वाणिज्य, सह संयोजक व तकनीकी विशेषज्ञ डॉ यशवंत सिंह पंवार, सहायक प्राध्यापक गणित और डॉ धर्मेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक वनस्पति शास्त्र द्वारा सफलतापूर्वक किया गया ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ ऋतु विश्वकर्मा, सहायक प्राध्यापक इतिहास और वक्ताओं का परिचय डॉ श्रद्धा आशापुरे, सहायक प्राध्यापक अंग्रेजी द्वारा कुशलतापूर्वक प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय वेबीनार का *ऑनलाइन फीडबैक* देते हुए जयपुर से डॉ कृष्णबीर सिंह, डॉ दीपक सालवी और सनावद महाविद्यालय से श्री योगेश जोशी आदि प्रतिभागियों ने कहा कि *यह वेबिनार उच्च शिक्षा में करियर काउंसलिंग और मोटिवेशन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।* कार्यक्रम के अंत में आभार डॉ बघेल द्वारा दिया गया।