रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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पेटलावद। शासन-प्रशासन लाख कोशिश करें…कि ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को रोका जा सके…ग्रामीणों को रोजगार मिले और मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके। किंतु पंचायत स्तर पर बैठे जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी को इस कदर निभा रहे हैं कि ग्राम पंचायतो में भ्रष्टाचार चरम पर नजर आ रहा है। ग्रामीणों के हक पर डाका डालते हुए ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सरपंच और सचिव अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं। ताजा मामला पेटलावद जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धोलीखाली से सामने आया है। जहां इन दोनों भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। सरपंच-सचिव की मिली भगत से ग्राम पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। ग्रामीणों को रोजगार देने के स्थान पर मशीनों से कार्य करवाया जा रहा है और ग्रामीणों के हक पर डाका डालने का काम किया जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण दो दिन पूर्व ग्राम पंचायत धोलिखाली के सूखनेड़ा गांव में देखने को मिला। जहां कई वर्ष पूर्व में बनाए गए तालाब की मरम्मत के नाम पर रात्रि में चोरी छुपे अंधेरे के सहारे जेसीबी मशीन की मदद से कार्य किया जा रहा था।
जिसकी खबर ग्रामीणों को लगी तो तत्काल बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आक्रोशित होकर जेसीबी मशीन से किये जा रहे हैं कार्य को रुकवाया गया। और पंचायत के जिम्मेदारों से जवाब मांगा गया कि आखिर गांव में ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है ऐसी स्थिति में मशीनों से कार्य क्यों करवाया जा रहा है। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मौके से पंचायत की जिम्मेदार जेसीबी मशीन लेकर उल्टे पैर लौट गए।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत के जिम्मेदार इसी तरह ग्रामीणों के हक पर डाका डाल रहे हैं। पंचायत में जोरो पर भ्रष्टाचार जारी है। चाहे मनरेगा से जुड़ा कार्य हो या फिर 15 वित्त से जुड़ा मामला हो। यहां पंचायत सिर्फ और सिर्फ अपना हित देख रही है। ऐसे में ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है ना ही पंचायत से ग्रामीणों को रोजगार मिल पा रहा है। ग्रामीण सिर्फ इधर-उधर भटकने को मजबूर है।