भियां राम राम…!
लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ…!
भियां वो केते है ना… कुत्ते की पुंछ कितने भी साल भुंगली में रखों… वो टेढी की टेढी रेती है… ऐसेईज भियां कुत्ते की पुंछ की तरह सफेद पोश काले भाई साब है… जिसको मां रूपी भाजपा ने क्या कुछ नी दिया… लेकिन इसने उसी मां की पीठ में खंजर ही खंजर घोपे…. और उसके आंचल तक को लज्जित कर दिया… आज से नी… भियां 2002 से इसका काला साया भाजपा पर पड गिया था… तब से लेकर अब तक इसने भाजपा को डुबोने में कोई कसर नी छोडी… और अब नागरसिंह को डुबोने में लग गिया है… वो दिन दुर नी जब चुनाव के बाद नागरसिंह इसकों गालियां नी दे… भियां भाजपाईयों और नागरसिंह अभी भी वक्त है संभल जाओं…. एक बात पते की बताता हुं… पुरे देश में मोदीजी की एक तरफा हवा है… ऐसे में पिछले काफी समय से भाजपा की हार का कारण सिर्फ और सिर्फ इसका काला साया है… नी समझ आ रिया तो मैं तुमकों इसका इतिहास बताता हुं… कि कैसे इसका काला साया भाजपा पर पडा…!
भियां सबसे पेले बात करते है छितु की जो एक अच्छा आदिवासी नेता होने के साथ साथ भाजपा के उस विपरित समय में झंडे तोक कर चला जब भाजपा का नाम लेते ही कांग्रेसी ठोकते थे…ऐसे में भियां पेला शिकार इस सफेद पोश काले भाईसाब ने छितु को बनाया…। इसको डर था कि कई छितु जिलाध्यक्ष न बन जाये… तो इसके छितु को अपने जाल में फंसा कर उसकी छवि धुमिल करने में क्या कसर नी छोडी और आखिर में छितु का राजनैतिक करीयर खतम होने लग गया…।
फिर भियां इसने मनोहर से नजदीकियां बढाई… फिर अंदर ही अंदर उसे खिलाफ साजिश रचना चालु कर दी… साजिश भी ऐसी कि मनोहर का राजनैतिक जीवन खत्म हो जाये… और आखिर में उसको जिलाध्यक्ष पद से निपटवा ही दिया। इसी बीच भाजपा की सरकार भी आ गई थी… पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव में सम्मानीय गंगाबाई जी नगर पालिका अध्यक्ष बनी… फिर इस काले कलुटे ने गंगाबाई का दामन थाम लिया… और गांधीछापों के चक्कर में ढाई साल में उनकों भी पद से हाथ धोना पडा… भियां जब जब इस काले भाईसाब का साया किसी पर पडा वो गर्त में ही गिया… अब आई बारी रेलम जी की… नगर पालिका में उनको डुबोया डुबोया… और जब उनको लोक सभा में टिकट मिला तो इन काले भाई साब के माईक्रो मेनेजमेंट ने उन्हें घर बैठाया बैठाया… बाद में इसके चक्कर में उनको जिला तक छोडना पड गिया…।
भियां आदिवासी समाज का उभरता हुआ युवा चेहरा… जिसने भाजपा का झंडा ऐसा गाडा की भोपाल से दिल्ली तक उसके चर्चे हुए… वो कोई ओर नही हमारे लाडले स्वर्गीय पवेसिंह जी जिनका नाम इतना चर्चाओं में रहा कि विधायक रहते उन्होने विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी थी… लेकिन उन पर भी इस काले भाईसाब का साया पड गिया… उनकों इस कलुटे ने ऐसा जाल में फंसाकर सुरा सुंदरी में लगा दिया… अंदर ही अंदर उनको खत्म करने की साजिश रची और अंत में उनका स्वर्गवास हो गया।
फिर बने काले भाईसाब अध्यक्ष… अध्यक्ष बनते ही समाज हित में इन्होने सटटा, जुआ, अवैध वसुली, मातृ संगठन के विपरित जाकर वर्ग विशेष को संरक्षण देकर अधिक से अधिक लाभ पहुचाया… अवैध पशु मांस विक्रेता को संरक्षण देना इनका खास काम था… इसी वजह से इनका नाम काले भाईसाब की जगह सलीम भाईजान से जाना जाने लेगा…। इसी दौरान सुखा अंगुर इनके संपर्क में आई… और इसने फर्जी दस्तावेज लगाकर सुखे अंगुर की नौकरी लगवाई… इसके आने जाने… और सुखे अंगुर के साथ रचाई जा रही रास लिलाओं की वजह से सुखे अंगुर का पति इतना परेशान तनाव में आ गिया था कि उसे अपने जीवन से हाथ धोना पडा… इसी बीच पटवारी से सेटिंग कर जुवे का अडडा घपाघपलम के नाम से अडडा बनाया… जिसकी वजह से आज भी कुछ लोग न्यायालय के चक्कर लगा रिये हैं।
तब भाजपा का एक अपना ही दौर चालु हुआ… सरकार अपनी… सब अपना… तो ऐसा कोई काला कारोबार नी… जो इसने नी किया हो… इसी दौरान पर्वत अध्यक्ष बना… पर्वत को भी इसने अपना शिकार बनाकर निपटाया… इस बात की खबर माखनसिंह जी को पडी… तो माखनसिंह जी ने इन्हें 8 महिने में ही निपटा दिया… भरे मंच से इस काले भाईसाब को जलील कर अध्यक्ष पद से हटाया था…।
फिर इसके जाल में फंसा शांतु… जिसे इसने ऐसा इस्तेमाल किया… जैसे कि शांतु का रिमोर्ट इसके हाथों हो… उसके पीछे अपने गुर्गो को इसने ऐसे लगाया किया उसका राजनैतिक जीवन खत्म करवा दिया। जब उसने दुरी बनाई तो फिर गुर्गो को उसके पीछे छोडा… और आज वो हमारे बीच नही है… लेकिन वक्त उसका गवाह है।
जो व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में इस सफेद पोश काले भाईसाब को अपना गुरू मानता था धन्नु… उसका जीवन तो इसने झंट कर दिया… उसे भी अपनी तरह नारी उत्थान के कार्य मे लगाकर भ्रष्टाचार की ऐसी इबादत लिखी कि इतिहास के पन्नों मे ंइन्हें याद किया जायेगा।
इसी गुरू की देन है कि आज धन्नु भाजपा का जो सबसे अच्छा कार्यकर्ता हुआ करता था… आज वो सपरिवार भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से बहार है और हाल ही में हुए नगर पालिका व विधानसभा चुनाव में इनके चेहरे भी सामने आ गिये…।
रानापुर के दंपत्ति को तो इसने रास्ते पर लाकर खडा कर दिया और चुराना पर इसकी काली छाया पडी तो कुछ माह में ही जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया गया। भानु जिसने काले भाईसाब के माईक्रो मेनेजमेंट पर विश्वास किया… उसको निपटाने में भी इसकी अहम भुमिका रही… चुराना पर इसकी छाया पडी तो वो एक माह में ही जिलाध्यक्ष से हट गिया… इतने से भी इसका पेट नी भरा… तो एक शिक्षित, उच्च पद पर है गुमान का भी गुमान इसने खत्म कर दिया…इस वजह से संगठन व समाज से दुर कर गढवाडा तक ही सिमित कर दिया।
भियां अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… भाजपाईयों… ये तो बडी है… ऐसे छोटे छोटे लोगों को हजमक डकार तक नही लेता है… इसलिए भाजपाईयों न नागर सिंह जी समय रहते इस ओर ध्यान दिजीये।… कहीं मोदीजी का नाम आप धुमिल न कर दे… इस सफेदपोश काले भाईसाब ने सिर्फ और सिर्फ… चिकली से लेकर कई समाजों तक महिला उत्थान का काम ही किया है..अब जा रिया.. जय राम जी की…!