झाबुआ। इन दिनों नगर में जनचर्चा है कि जब से थाना प्रभारी का तबदला हुआ है तब से झाबुआ कस्बे में अपराधिक गतिविधियां बढती ही जा रही है। सुखे नशे का कारोबार दिन ब दिन फलता फुलता नजर आ रहा है। हाल ही में गादिया कॉलोनी के समीप कुछ नशेडियों ने उत्पात मचाया और मारपीट भी जिसकी सुचना पुलिस को भी गई लेकिन कोई कार्रवाई नही की गई। खैर जनता कह रही है तो कुछ तो सही होगा।
सुत्रों का तो यह भी कहना है कि थाने के सामने से अवैध शराब भर कर गाडियां जाती है लेकिन कोई कार्रवाई नही की जाती है। पुलिस तो बस राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर कार्य कर रही है। खैर हमें क्यों इस और तो ध्यान पुलिस अधीक्षक साहब को देना होगा… क्योंकि जिस थाना प्रभारी को ग्रामीणों के साथ अपशब्दों के प्रयोग के लिए लाईन अटैज किया हो उसको तुरंत झाबुआ जैसे शहरी थाने को देने कई सवालिया निशान खडा कर सकते है। खैर इससे हमें क्या जनता बोल रही है उससे छुप तो नही किया जा सकता है। लेकिन बात यह है कि एसपी साहब जिस तरह से जिले की तस्वीर बदलने में लगे है उससे तो उनकी ही छवि धुमिल होगी।
जनचर्चा यह भी है कि झाबुआ थाने में कई थाना प्रभारी आये और चले गए। लेकिन बडे से बडें मामले उन्होने चुटकियाें में हल कर लिए और मामले शांत हुए… लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी घटना में किसी की मौत हुई और घर के सामने घंटों तक शव पडे। जी हां इन दिनों लोगों में जनचर्चा का विषय बना हुआ है मामले एक नही दो दो है दोनों व्यक्तियों की मौत दुर्घटना में हुई थी एक का शव चारोलीपाडा तो दुसरे का नल्दी में घंटों तक पडा रहा… चारोलीपाडा मामले में तो नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने जब एसपी साहब को अवगत करवाया तब जाकर मामला शांत हुआ। अब आप ही बताईयें नगर को एक अच्छे थाना प्रभारी की आवश्यकता है या नही। बाकि अगले अंक में…!