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कहीं शाद ने तो कहीं अजफर ने रखा अपनी जिंदगी का पहला रोजा नन्ही मुन्नी माहेरा ओर अरमिश ने भी पुरी शिद्दत से रखा पहला रोजा

वॉइस ऑफ झाबुआ

झाबुआ – रमाजन-उल-मुबारक का पवित्र महीना चल रहा है। रहमतों बरकतों से भरपूर इस महीने में जहां बड़ों ने रोजा रखाकर शाम को इफ्तारी की तो वहीं इस गर्मी में नन्हें-मुन्ने बच्चे भी पीछे नहीं रहें।

नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी तेज धुप व भीषण गर्मी में रोजा रखकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहे और पांचों वक्त के नमाज भी अदा कर रहें हैं। क्योंकि माहे रमजान में रोजा हर मुसलमान मर्द, औरत व बालिग पर फर्ज है। इस लिए इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते है और ज्यादा से ज्यादा इबादत करने में मशगुल रहते है।

माहे रमजान को लेकर बच्चों में भी गजब का उत्साह रहता है बच्चे भी इस धुप व गर्मी में रोजा रखकर बड़ों को भी पीछे छोड़ रहे हैं। और अल्लाह की इबादत में मशगुल हो रहे हैं। वही झाबुआ के राणापुर में रहने वाले मोहम्मद शाद शेख़ पिता जमालुद्दीन शेख़ ने 7 वर्ष की उम्र में अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा और साथ ही उनकी बहन अरमिश खान भी अपनी 6 वर्ष की उम्र में पहला रोजा रखा। शेहरी से लेकर पांचो वक्त की नमाज, अल्लाह की इबादत करना, और शाम को इफ्तारी कर के रोजा खोला।

मेघनगर के नयापुरा में रहने वाले 9 वर्षीय अजफर शेरानी और 6 वर्षीय माहेरा खान ने भीं रमजान-उल-मुबारक का पहला रोजा रखा। उम्र भले ही छोटी उत्साह नहीं है कम, छोटे बच्चे भी शिद्दत से रख रहे रोजा। क्योंकि यह महीना सब्र का होता है। पवित्र माहे रमजान के महीने में रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करने से इंसान अपने आप को अल्लाह के करीब पाता है। क्योंकि रोजे का बदला बंदे को अल्लाह से मिलता है। सभी मासूम बच्चों को परिवार वालों ने तहे दिल से मुबारकबाद दी और मिठाई खिलाकर एवं फूलों की माला पहन कर मुबारकबाद दी।

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