दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
नेशनल हाईवे-56 पर बायपास निर्माण के विरोध में चंद्रशेखर आजाद नगर एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे चार गाँव के आदिवासी किसानो का आज छटा दिन है। ओर प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान ही नही है आपको बता दे कि छः दिन से आदिवासी किसान अपनी जमीन बचाने के लिए बैठे हुए है विलेश खराडे ने बताया कि अगर आज हमारी बात नही सुनी गई तो हम सब मिलकर वोटर आईडी को अग्नि में दहन कर देंगे ओर आने वाले लोकसभा चुनाव में वोट किसी को भी नही देंगे।

आखिर क्या कारण है चंद्रशेखर आजाद नगर में सड़क निकालने के लिए पर्याप्त जमीन होते हुए भी प्रशासन गरिब आदिवासी किसानों की जमीन पर बायपास बनाना चाहती है अगर आम्बुआ से सेजावाड़ा NH-56 में चंद्रशेखर आजाद नगर में बायपास निकलता है तो चार गांवों के आदिवासी किसानो को गुजरात पलायन के लिए जाना पड़ेगा।लगातार दो तीन महीनो से विरोध के बाद भी गरीब आदिवासी को उजाड़ने में लगा है जिला प्रशासन लेकिन इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की अपनी बड़ी मंशा रही है विशेष सूत्रो से ज्ञात हुवा है की आजाद नगर के बड़े नेता जिनके शासन काल में नगर में सेकडो दुकानों का निर्माण हुवा जिसकी शासन प्रशासन से अनुमति ही नही ली क्योंकि उनका और उनकी पार्टी का एक छत्र राज्य रहा है पूरे मध्यप्रदेश में और जिन्होंने कमिसन का एक बहुत बड़ा खेल खेला नगर के व्यापारियों के साथ अगर सड़क मार्केट से निकल जाती तो उन नेता और नगर परिषद को व्यापारियों की राशि को लोटना पड़ता और व्यापारियों का भारी विरोध सहना पड़ता और आगामी दिनों में नगर परिषद भी उनके हाथो से चली जाती जिनके कारण कुछ पार्षद और विधायक और सांसद ने मिलकर गुपचुप तरीके से रोड बनाने की अनुमति प्रदान कर दी जिससे आज चार गांव के कई आदिवासी परिवार उजड़ जायेगे तथा जिसके कारण आदिवासी संस्कृति और उनके समाज से दूर हो जायेगे लेकिन रोड डेवलीपमेंट और स्थानीय प्रशासन मोन है क्योंकि उनको मोटी कमाई कमिसन के रूप में जो आगे मिलना है तो कोई भी उजड़े उनको कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन 50 लोगो को रोजगार देने के चक्कर में 900 लोगो की जमीन को सड़क बनाकर उजाड़ देना कहा का इंसाफ है आगे देखना है की चार गांव के आदिवासी ग्रामीणों का संघर्ष क्या रंग लाता है और आगे खबर लिखे जाने तक ग्रामीण आंदोलन स्थल पर जुटे हुवे है ।।