दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा चंद्र शेखर आजाद नगर भाभरा वन क्षेत्र और राजस्व क्षेत्र ,वही काठ्ठीवाड़ा वन क्षेत्र और राजस्व क्षेत्र ,उदयगढ़ वन क्षेत्र और राजस्व क्षेत्र की सीमाओं में अवेध उत्खनन कर मिट्टी और मोरम से रेत बनाने का जो गोरख धंधा चल रहा है ।
जिसको सहयोग वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सहयोग कर रहे है वॉइस ऑफ झाबुआ में खबर लगने के बाद जो लोग अपने निजी खेत के किनारे निकली हुई नदी नालों से रेत लेकर विक्रय करने आ रहे लोगो के ट्रैक्टर फॉरेस्ट कर्मचारियों ने पकड़कर उनका प्रकरण बना लिया है और उन पर दिखावे की करवाही कर रहे है
जबकि असली रेत माफिया द्वारा जेसीबी मशीन से राजस्व और फॉरेस्ट की भूमि पर रेत निर्माण कर करोड़ों रूपयो की रेत बेच दी और राजस्व और फॉरेस्ट अधिकारियों की आंखे खुली नही थी जब खबरे समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई तभी अधिकारी और कर्मचारी विभाग से बाहर आए और करवाही की वो भी दिखावे की अगर कार्यवाही सही होती तो आज सभी जेसीबी फॉरेस्ट विभाग या राजस्व विभाग पकड़कर जेसीबी मशीन मालिक के खिलाफ कार्यवाही कर चुका होता लेकिन कमिसन खोर अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से सारे रेत माफिया और ट्रैक्टर आज भी खुल्ले आम रेत बनाकर बेच रहे है । पस्टर बिना , लीलू उमरी, विनत, पानगुडा के बाद अब रातों रात अपनी जगह की बदलकर टोकरियां झिरन में भी अवेध रेत का निर्माण चालू है और रात्रि में जेसीबी मशीन से तालाब के अंदर मिट्टी से रेत बना रही जेसीबी और ट्रैक्टर के वीडियो सोसल मीडिया में वायरल हो रहे है जिसके बाद भी प्रशासन कार्यवाही नही की जा रही है ।
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा राजस्व और फॉरेस्ट के बड़े भू भाग में अवेध रेत निर्माण की जा रही है जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है क्योंकि यहां किसी भी रेत माफिया के पास विधिवत लाइसेंस ही नही है रेत विक्रय करने और उसके निर्माण करने का फिर भी बड़े बड़े भू भाग में अवेध रेत निर्माण की जा रही है ।और उसको विक्रय कर मुनाफा कमाया जा रहा है और सरकार को राजस्व का चूना लगाकर माफिया करोड़ पति हो रहे है ।।