झाबुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के आदेशों का पालन सरआंखों पर लेते हुए पालन किया जा रहा है। यहां तक की पडोसी जिले में मटन चिकन विक्रेताओं पर कार्रवाई की गई यहां तक की नियमों का पालन नही करने वालों के यहाँ पर बुल्डोर तक चल गया। लेकिन अब तो लोग भी कहने लग गए है जिले का प्रशासन एक दम निठल्ला है जिसके सामने मुख्यमंत्री जी का आदेश भी कुछ नही है।

तभी तो इन मांस विक्रेताओं के हौसलें इतने बुलंद है कि एसडीएम के सामने यह तक कह गए कि हम नगर पालिका परिसर में मटन चिकन की दुकानें लगायेंगे। अब आप ही सोचिये इन्हें प्रशासन की कितनी शह प्राप्त है कि ये ये बात भी कह गए। चलो ये भी ठिक था विरोध हो रहा है गुपचुप तरीके से चिकन मटन बेच भी रहे है तो किसी की आस्था से कैसे खिलवाड कर रहे है। मामला है जेल बगीचे हनुमानजी के मंदिर का है जिसके परिसर के अंतिम छोर पर किसी चिकन मटन विक्रेता ने मुर्गे के चिछडे फेंक दिए जो कुत्ते मंदिर के पास लेकर आ गए।

मंदिर के समीप पर ये चिछडे फेंकने की जरूरत ही नही थी बहुत सारी जगह है वहां भी फेंक सकते है लेकिन ऐसा नही किया गया। लोगों का कहना है और सुत्र भी बताते है कि ये कृत्य जानबुच कर किया गया है। क्योकि वो जानते है कि प्रशासन तो कुछ करेगा ही नही हमारी जो मर्जी होगी हम करेंगे। जनचर्चा है कि अगर कोई शिकायत भी करता है तो पुलिस नगर पालिका पर ढोलती है और नगर पालिका प्रशासन पर ढोलता है तो फिर कार्रवाई करेंगा कौन? सभी पल्ला झाडने में लगे है नेता नगरी तो कही से कहीं तक नजर ही नही आ रहा है और बातें बडी बडी करते है।

कुछ दिनों पहले नगर पालिका कर्मियों के साथ विवाद हुआ लेकिन नगर पालिका द्वारा कोई कार्रवाई नही करना चाही। सीएमओ को कार्रवाई करनी चाहिए तो वो नगर पालिका ही दोपहर में आते है और ऐसा लगता है सीएमओ साहब को किसी ने खुदा का वास्ता दिया है तभी वो कुछ करना ही नही चाह रहे है। कर्मियों के साथ हुए विवाद को जिम्मेदार प्रभारी को कार्रवाई करवानी चाहिए थी लेकिन वो भी कुछ नही कर पाये। पुलिस को सुचना दो तो उनके ही नुमाईदें पहले ही सुचना दें देते है अगर यकीन ना हो तो 31 दिसम्बर के रात्रि 7ः40 से 8ः30 के सीसीटीवी फुटेज देख लिजीये कौन दलाल है.. जो सुचना मिलने पर बडे पशुओं के मांस विक्रेताओं के घर जाते है और थप्पड मारकर रूपये ऐठ कर आ जाते है.

ये हम नही कह रहे है ये नगर की जनता कह रही है और जनचर्चा ये भी है पुलिस कप्तान तो इन वसुलीबाजों के संरक्षक है जो मानवीयता का चेहरा लोगों के बीच बताकर ऐसे कर्मियों को संरक्षण देते है क्या सरकार पुलिस को थाने का खर्च नही देती की पानी, चाय नाश्ता बडे पशुओं से लिये गए लक्ष्मी यंत्रों से ये खर्चे पुरे किए जा रहे है। सुत्रों की माने प्रशासन और मांस विक्रेताओं के खिलाफ 24 जनवरी तक एक बडा आंदोलन होगा।
