क्या आप पढे लिखें है…?
तो क्या आपको कार्यवाहक अध्यक्ष व अध्यक्ष में अंतर समझ नही आया..?
भानु को बदलना होगा पुरा संगठनात्म ढांचा…!
जयचंदों के मुगालते करना होंगे दुर इन्ही की वजह से जिले में भाजपा है खतरें में !
वॉइस ऑफ़ झाबुआ-
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झाबुआ। पिछले काफी समय से देखने में आ रहा भाजपा से जो प्रेसनोट जारी किए जा रहे थे उसमें भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण सुराना के नाम से जारी किये जा रहे थे। जबकि भाजपा आलाकमान ने प्रवीण सुराना को कार्यवाहक अध्यक्ष के पद पर मनोनित किया था। वो भी इसलिए क्योंकि भानु भूरिया भाजपा प्रत्याशी चयनीत किए गए थे ऐसे में कार्यवाहक की आवश्यकता थी। लेकिन कुछ लोगों को कार्यवाहक की परिभाषा ही नही मालुम ऐसे में भाजपा की ओर से जिलाध्यक्ष वाले प्रेसनोट जारी किये जा रहे थे। कई लोग कार्यवाहक अध्यक्ष को अध्यक्ष कह रहे थे। अब जो पढा लिखा होगा वो ही समझ पायेगा कार्यवाह अध्यक्ष और अध्यक्ष में अंतर। अब चुनाव बाद एक बार फिर भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भानु भूरिया को मनोनित कर दिया है। ऐसे में अब भानु को अपना और पराया का अंतर समझना होगा। कईयों ने विधानसभा चुनाव में सेंध मारी थी। ऐसे में अब जिले की संगठनात्मक संरचना बदलनी होगी. एक नई कार्यकारिणी का गठन करना होगा. जिससे भाजपा मजबुत हो सके और जो सिर्फ भाजपा के लिए ही काम करें। विधानसभा चुनाव में कई गददारों के चेहरों सामने आये उन चेहरों को भी आला कमान के सामने लाकर इन जयचंदों के मुगालते दुर करना होंगे।
कुछ जयचंदों ने भाजपा को पुरी तरह डुबोने का सोच रखा है जो अपने को कटटर भाजपाई बताते है और काम किसी और के लिए करते है। पिछले कुछ चुनाव देंखें तो इन जयचंदों की वजह से भाजपा को हार का सामना करना पडा है। इन जयचंदों को जल्द से जल्द बहार का रास्ता दिखाना जरूरी है। नही तो वो दिन दुर नही कि एक दिन जिले की तीनों विधानसभाओं में भाजपा का नामों निशान खत्म हो जायेगा।
संगठनात्मक ढाचें में भी परिवर्तन करना नितांत आवश्यक है क्योंकि इन्होंने भी भाजपा के खिलाफ ही काम किया है। नई शुरूआत नए लोगों के साथ जो भाजपा के लिए नतमस्तक हो. न की लक्ष्मी यंत्रों के दास… जो लक्ष्मी यंत्रों के चक्कर में लोगों के पीछवाडे भी धोने तैयार हो जाये ऐसों को संगठन से बहार करना जरूरी है।