
झाबुआ। ज़रा अपना ज़मीर तो जगाओ आदिवासियों के नाम पर रोटियाँ सेकने वालों.. तुम्हारे बच्चे निजी स्कूल में पढ़ रहे है तो क्या हुआ. एक ग़रीब आदिवासी का बच्चा तो सरकारी स्कूल में पढ़ता है.. पवारलूम के नाम पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है उसकी सारी परते खुल चुकी है.. लेकिन ज़िला प्रशासन को ज़रा भी शर्म नहीं है की वो कारवाई करे.. उल्टा हिंदू जनजाति संगठन के पदाधिकारियों को कह रहे है इतने रुपए में ऐसी ही ड्रेस आती है.. लेकिन प्रकति की मार झेलनी ही पड़ेगी. क्यूकि ग़रीब बच्चों के तन ढकने वाली स्कूल ड्रेस पर डाका डला है. बस हिंदू जनजाति संगठन ही है जो बेबाक़ी से इस मुद्दे को उठा रहा है. ना पक्ष कुछ बोल रहा है ना विपक्ष सब के सब चुप्पी साधे बैठे है.. कैसे बोलेंगे सब का कमीशन है.. सूत्र बता रहे है और हिन्दू युवा जनजाति संगठन का आरोप है कि सहायक ज़िला पंचायत सीईओ और पूर्व डीपीएम श्रीवास्तव का ये पूरा खेल है जो पॉवरलूम के नाम पर अलग अलग ठेकेदारों से घटिया क़िस्म की स्कूल ड्रेस सप्लाय करवा रहे है.. और पॉवरलूम के नाम से फर्जी बिल बनवा रहे है. और ज़िले के अधिकारियों को जैसा पद वेसा कमीशन मिल रहा है.. सूत्र तो ये भी बता रहे है की इंदौर का जो ठेकेदार है वो मंत्री जी का ख़ास है.और मंत्री जी और ये दोनों अधिकारी मिल कर सारा खेल रहे है. झाबुआ ज़िला आदिवासी बाहुल्य ज़िला है यहाँ के ग्रामीण इतने सक्षम नहीं है ऐसे में किसी भी पार्टी का मंत्री हो उस पार्टी के नेताओं और पार्टी का बहिष्कार करना चाहिए. विधान सभा चुनाव सर पर है ऐसे में उस भ्रष्ट पार्टी को वोट भी नहीं करना चाहिए. सूत्र बताते है जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में इस भ्रष्टाचार को लेकर पार्टी के ख़िलाफ़ वोट ना करने की अपील की जाएगी.. हिंदू जनजाति संगठन के कमलेश मावी जी का कहना है आदिवासी क्षेत्र में हम इस तरह का भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे. पॉवरलूम के नाम पर जिम्मेदार अलग अलग ठेकेदारों से घटिया क़िस्म की स्कूल ड्रेस सप्लाय करवा रहे है.. जबकि पॉवरलूम कभी कपड़ा सील कर नहीं देती. ये पॉवरलूम के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है और प्रशासन जान कर भी अनजान बन रहा है सब कुछ सामने है फिर भी कारवाई ना होना ज़िला प्रशासन पर कई सवालिया निशान खड़े कर रहा है अगर कारवाई नहीं होती है तो हिंदू युवा जनजाति संगठन विभाग का घेराव करेगा और घटिया गणवेश की होली जलाएगा तथा विरोध स्वरूप उन्हें सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसकी सारी ज़िम्मेदारी ज़िला प्रशासन की होगी।