झाबुआ। आधार कार्ड अपडेट करवाने के लिए ग्रामीणों का रात गुजरना.. घंटों तपती में खड़े रहना.. नम्बर नहीं आने पर दूसरे दिन आना.. फिर नम्बर लगाना…. 4-5 दिन में भी आधार नहीं बनना.. इससे प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता.. उन्हें तो अपनी। ग़लतियाँ छुपाने से ही मतलब है.. क्या है आदिवासी समाज के ग्रामीण है.. उन्हें तो इंतज़ार करने. और धक्के खाने की आदत है.. बस यही सोचता है प्रशासन.. नगर में जनचर्चा है कि प्रशासन शिर्फ ओपचारिकता निभा रहा है.. 10-15 मिनिट खड़े रह कर देखने से कोई जाँच नहीं हो गई. आज झाबुआ एसडीएम आधार केंद्र पोस्ट ऑफिस गये. 15 मिनीट खड़े रहे और उन्हें आधार केंद्र पर सब कुछ सही नज़र आया. 15 मिनिट में सब सही नज़र आ गया और जो ग्रामीण घंटों धूप में खड़े रह कर आधार अपडेट करवाने आए उसका क्या.? हाँ वो आदिवासी है… इसलिए उनकी तकलीफ़ उन्हें क्या नज़र आएगा.. ज़िला प्रशासन को किसी से कोई मतलब नहीं है सूत्र बताते है इस लिए सभी ने मिल कर कलेक्टर मेडम की शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को शिकायत की थी. सूत्र ये भी बताते है की उस समय मेडम वहाँ उपस्थित थी. और खुले तोर पर कार्यकर्ता द्वारा बात नहीं सुनने.. काम नहीं करने कि बात कही.. शिकायत ये भी हुई की मेडम अपनी मनमानी कर कार्य करती है किसी की सुनती नहीं है.. बस अपना आदेश थोपती है ये हम नहीं कह रहे है ये नगर की जनता और भाजपा कार्यकर्ता की आम जनचर्चा है. और आज जिस तरह से जनसंपर्क से एसडीएम साहब के निरीक्षण का प्रेस नोट जारी हुआ इससे साफ़ पता चल रहा है प्रशासन अपनी गलती छुपाने के लिए क्या कर सकता है? जयस संगठन, आम आदमी पार्टी और भाजपा कार्यकर्ता द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया था.. लेकिन 15. मिनट में साहब जॉच कर चल निकले. मतलब साफ़ है कलेक्टर महोदया का आदेश शिर्फ ओपचारिक था. उन्हें किसी की परेशानी से क्या मतलब. सूत्रों का कहना है तभी मेडम से कर्मचारी भी नाराज़ है मेडम घंटों घंटों बैठा लेती है. ऐसी बैठके तो कोई नहीं लेता. बैठक में बैठे की काम करें…
बाक़ी अगले अंक में.