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जयस और बिरसा ब्रिगेड युवाओं ने स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के 123 वे शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की


वॉइस ऑफ झाबुआ/देवास

देवास। आज संपूर्ण राष्ट्र के लिए मात्र 25 वर्ष की आयु में शहीद होने वाले स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा बिरसा मुंडा को मीठा तालाब स्थित पार्क में जयस बिरसा ब्रिगेड युवाओं द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहीद भगवान बिरसा मुंडा जिन्होंने अल्पायु में बंदूकधारी गोरी चमड़ी वाले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तीर कमान और गोफन से लड़ाई लडी़। घमंडी अत्याचारी अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। अल्पायु में राष्ट्र के लिए शहीद होने वाले बिरसा मुंडा के 123 वे शहादत दिवस पर जयस बिरसा ब्रिगेड युवाओं ने मीठा तालाब स्थित पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित की। सामाजिक कार्यकर्ता जयस नारी शक्ति अनिता अलावा ने बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड राज्य के उलिहातु में 15 नवंबर 1875 को किसान मजदूर परिवार में हुआ था। उन्हें जंगल में रहने वाले पशु पक्षियों से बात करने का हुनर था। वह बांसुरी बहुत अच्छी बजाते थे और बहुत अच्छे वैद्य भी थे। सन् 1885 मैं लगान माफी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोला। सन् 1897 से से लेकर सन् 1900 तक अंग्रेजो के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ा। 9 जून 1900 को रांची जेल में रहस्यमई मौत हो गई थी। शोषण और अत्याचार के खिलाफ लडऩे वाले सच्चे लड़ाके थे। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर साहस वीरता और आत्म सम्मान की श्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की शब्दावली रची थी। राकेश देवडे़ बिरसावादी ने कहा – ” अबुआ दिशुम अबुआ राज यानी हमारे गांव में हमारा राज का नारा बुलंद करने वाले बिरसा मुंडा स्वयं में एक वैचारिक विश्वविद्यालय है जिन्हें शब्दों में समेट पाना संभव नहीं है।अपनी संस्कृति को बचाने के लिए संघर्षरत एक सामाजिक योद्धा का नाम है बिरसा मुंडा, अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम और जल जंगल जमीन बचाने के लिए देश के युवाओं में क्रांति उत्पन्न करने का नाम है बिरसा मुंडा।बिरसा मुंडा का ने कहा था – व्यक्ति आर्थिक रूप से करीब रहेगा चलेगा लेकिन वैचारक रूप से गरीब नहीं होना चाहिए। जयस के युवा अनिल बरला ने बताया कि बिरसा मुंडा के आंदोलन से देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने प्रेरणा ली थी उन्होंने कहा था बिरसा मुंडा के आंदोलन की पूरे देश में आवश्यकता है और फिर उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी।बिरसा मुंडा को गांधी से पहले के गांधी भी कहा जाता है। इस अवसर पर दयाराम ठाकुर ,राकेश वास्केल, मुकेश सोलंकी, पप्पू सोलंकी,मनोज मरकाम, प्रितम बामनिया ,भानु प्रताप सिंह,बाबु रावत, संदीप ठाकुर, विष्णु मोरे, राकेश देवड़े बिरसावादी इत्यादि जयस बिरसा ब्रिगेड कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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