झाबुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का अपने चहेते मनीष से मोह ही नही जा रहा है… बाकानेर जिला धार में मनीष सेन ब्लॉक लेखा प्रबंधक के रूप में नियुक्ति हुई थी… सरकार ने इस नियुक्ति में गढबढी पाए जाने पर नियुक्ति को निरस्ती के आदेश दिए… जिसके बाद अभ्यार्थियों द्वारा न्यायालय में अर्जी लगाई थी… अब न्यायालय में प्रकरण चल रहा है… जब नियुक्ति हुई उसके कुछ साला के बाद मनीष सेन ने धार में एक महीने का नोटिस देकर अपने पद से इस्तीफा दिया और भोपाल मिशन संचालक कार्यालय में क्वालीटी इंश्योरेंस के पद पर तीन माह तक कार्य किया… उस पर पर रहते हुए तीन माह तक वेतन भी प्राप्त किया। अब समझ से परे ये है कि इस्तीफा देने के बाद मनीष सेन ने वापस उसी पद पर कैसे ज्वानिंग कर ली। इस्तीफा दिया एक माह का नोटिस भी दिया फिर उसी पद पर उसी जगह वापस कैसे मनीषजी वापस आ गए। ऐसे में तात्कालीन सीएमएचओ, बीएमओ व कई अधिकारी शंका के घेरे में आ रहे है। चलो ये भी ठिक ह ैअब बडी बात तो यह है की न्यायालय में प्रकरण चल रहा है और नियुक्ती ब्लॉक लेखा प्रबंधक के पद पर हुई अब मनीष जी कैसे जिला लेखा प्रबंधक बन गए। ये हम नही नगर की आम चर्चा है कि बेरोजगारों को नौकरी नही मिल रही है और इन साहब पर विभाग इतना मेहरबान है कि कुछ भी कर सकता है।
सुत्र बताते है की मनीष सेन सीएमएचओ साहब का बडा खास है वो जैसा कहता है साहब वैसा ही करते है… अगर कोई इसे कमीशन नही देता तो मनीष उसे साहब से कह कर पद से हटवा देता या फिर कार्रवाई करवाता… सुना तो ये भी है कि ये अपने आप को जिले के प्रभारी मंत्री का साख बताता है और कहता है तो करवाना हो कर दुंगा… प्रभारी मंत्रीजी अपने घर के ही है… कोई भी काम हो 20 से 30 परसेंट कमीशल लेगेगा और कोई भी काम हो जायेगा.. वो भोपाल का हो या फिर कहीं का भी… सुत्र ये भी बताते है कि रेगुलर फंड लाकर काम देने की बात को लेकर ये एक व्यक्ति से 1 लाख रूपयें खा गया और बाद में पता चला ऐसा कोई भी नही हुआ… तो प्रदेश के हर जिले में रेगुलर फंड के नाम पर राशि आवंटित करती ही है। ऐसे में उस व्यक्ति के 1 लाख डुब गए।