बालुसिंह बारिया
सरदारपुर। एसडीओपी रामसिंह मेडा को आखिरकार सरदारपुर से रवानगी दे दी गई है। करीब 5 माह पहले राजनीतिक दबाव में सरकार ने एसडीओपी मेडा को 600 किमी दुर निवाड़ी भेज दिया था। उनके स्थान पर निवाड़ी एसडीओपी आशुतोष पटेल को सरदारपुर भेजा था। लेकीन सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खडे एसडीओपी रामसिंह मेडा हाईकोर्ट पहुंचे थे और बीमार मां की सेवा के लिये उन्हे सेवानिवृति तक सरदारपुर ही रहने का निवेदन किया था। जिस पर कोर्ट ने स्थानांतरण पर स्टे दे दिया था। लेकिन राजनितिक दबाव के चलते एसडीओपी मेड़ा को एक तरफा रिलिव कर दिया गया है।
किया एक तरफा रिलीव –
फरवरी माह में सरकार की विकास यात्रा मे एसडीओपी रामसिंह मेडा को उनकी सक्रियता भारी पड गई। विकास यात्रा मे अपनी आयु को मात देकर नौजवान की भांति गांव-गांव का सफर कर सरकार की योजनाओं से जनता को अवगत कराया था। सुत्रों की माने तो विकास यात्रा में एसडीओपी का सक्रिय रहना सत्ताधारी नेताओं को पंसद नही आया। बुधवार शाम को एसडीओपी मेड़ा का एक तरफा रिलीव ऑर्डर जारी हुआ था। सूत्रों का कहना है कि राजनितिक दबाव में एसडीओपी को सरदारपुर से दूर भेजने के लिए उन्हें एक तरफा रिलीव किया गया है।
जनता से था सीधा जुड़ाव –
एसडीओपी रामसिंह मेड़ा का सरदारपुर तहसील की जनता से सीधा जुड़ाव हो गया था। जनता अपनी समस्या लेकर सीधें उनके पास पहुंच जाती थी। साथ ही जिस सक्रियता के साथ विभागीय काम को अंजाम दे रहें थे उससे हर कोई उनका कायल हो गया था। कुछ माह से एसडीओपी ने कई आपराधीक घटनाओ पर तुरंत एक्शन लेकर पुलिस की सक्रियता को साबित किया था। सुत्र बताते है कि जनता से सीधा जुड़ाव तहसील के नेताओं को रास नही आया। इसी वजह से एसडीओपी के स्थानांतरण के लिए काफी दबाव बनाया गया। अगर नेताओं का रवैया ऐसा ही रहा तो क्या भविष्य में कोई भी अधिकारी जनता से सीधा जुड़ पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है।