झाबुआ। झाबुआ एक आदिवासी बाहुल्य जिला है… यहां अधिकांशतः गरीब तबके के लोग निवास करते है… शिक्षा का 2023-24 प्रारंभ हो चुका है… ऐसे में स्कूल ड्रेस कॉपी किताबों की खरीदी की जायेगी… जिले में तो निजी स्कूल संचालकों ने मानों लुट मचा रखी है.. यहां इनके बतायी दुकानों पर ही स्कूल ड्रेस व कापी किताबें खरीदने की वजह से दुकानदार मंहगे दामों में ये सामग्री देते है।
तात्कालीन कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा गत वर्ष इस लुट फरोत से बचने के लिए समस्त निजी स्कूलों को आदेश जारी किये गया थे कि कॉपी किताबें और स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए स्कूल संचालक स्कूल के बाहर 5-5 स्कूल ड्रेस और कॉपी किताबों की दुकानों का नाम लिखें जहां से स्कूल ड्रेस व कॉपी किताबें खरीदी जा सके। लेकिन जो जिम्मेदार अधिकारी थे वो लक्ष्मी यंत्रों के सामने नतमस्तक थे ऐसे में इन लुट की दुकानों पर कोई लगाम नही कसी गई।
जिले में शिक्षा एक व्यवसाय बन चुका है अगर किसी छात्र को सिर्फ बेल्ट, टाई, शर्ट या फिर पेंट अलग से चाहिए तो दुकानदार उन्हे देने से मना कर देते है ऐसे में मजबुर होकर पालकों को अपने बच्चों के लिए पुरी ड्रेस खरीदनी पडती है… क्यूँकि दुकानदार एक सामान देता ही नहीं इस ही वजह से कई बार तो दुकानदारों के पालकों के विवाद भी हो चुके है। नगर के मध्य एक स्कूल ड्रेस विक्रेता घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस मंहगें दामों पर कर रहा है। लेकिन जिला प्रशासन इस ओर ध्यान ही नही दे रहा है। क्योंकि उन्हे क्या उन्हे उन्हे तो लक्ष्मी यंत्रों से मतलब है।
कलेक्टर महोदया से आग्रह है कि शिक्षा के नाम पर जो व्यवसाय हो रहा है उसे बंद किया जाये और ऐसे दुकानदारों की दुकानों पर जाकर ड्रेस की जांच की जाए कि किस तरह से बच्चों को घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस दी जा रही है और संबंधित स्कूल और दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाये।