बामनिया जितु बैरागी

ग्राम पंचायत बामनिया में एक के बाद एक बड़े घोटाले उजागर हो रहे हैं जिसमें पहले प्रधानमंत्री ग्रामीण गरीब आवास योजना में सरपंच सचिव और उनके स्वार्थी दलालों ने गरीबों के आशियाने पर पानी फेरते हुए घोटाला किया और अपात्र सरकारी कर्मचारियों और अपात्र स्थानीय तथा बाहरी लोगों को लाभ दिया था जिसकी जांच अभी बाकी ही है और एक बड़ा घोटाला खाद्यान्न वितरण प्रणाली को लेकर सरपंच सरपंच पति और परिवार का सामने आया है जिसमें वित्तीय वर्ष 2013-14 से लेकर वित्तीय वर्ष 2022- 23 तक गरीबों के पेट भरने के लिए चलाई जाने वाली योजना में खुद सरपंच परिवार जो शिक्षक इनकी माता स्वास्थ्य विभाग में नर्स थी उनके नाम से लगातार 6 सदस्य परिवार आईडी के नाम से शासन को गुमराह कर लगभग 10 वर्षों के अधिक समय से चुना लगाया जा रहा था।
क्या है मामला वर्ष 2013 का
वित्तीय वर्ष 2013 में समग्र पोर्टल पर दर्ज समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन मध्यप्रदेश शासन से जारी समग्र परिवार कार्ड नंबर 29848312 कुल 6 सदस्यों की समग्र परिवार आईडी मे मुखीया संजय मकोड़ बामनिया के नाम से जारी की गई थी परिवार आईडी में 6 सदस्यों के नाम संजय पिता रामसिंह मकोड़ उम्र 49 वर्ष, पत्नी रामकन्या संजय मकोड़ उम्र 38 वर्ष, माता ललिता पति रामसिंह मकोड़ उम्र 75 वर्ष, पुत्री धारना मकोड़ उम्र 21 वर्ष, पुत्री सुमन मकोड़ उम्र 19 वर्ष एवं पुत्र तेजस मकोड़ उम्र 18 वर्ष सभी 6 सदस्यों को समग्र परिवार आईडी में 18 वर्ष से अधिक बताया गया था और परिवार आईडी 10 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत बामनिया द्वारा जारी की गई थी।
वर्ष 2013 से वर्ष 2019 लगभग 6 वर्षों तक बिना खाद्यान्न पर्ची के लिए लाभ
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी तहसील पेटलावद द्वारा सूचना के अधिकार के अंतर्गत स्थानीय आवेदक जसवंत डामर को दी गई जानकारी के अनुसार शासकीय उचित मूल्य दुकान बामनिया पर प्रतिमाह आवंटन कुल राशन कार्ड संख्या के आधार पर मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से वर्ष 2019 के पहले पहुंचाया जाता था पहले का सारा डाटा ऑफलाइन दर्ज किया जाता था ऑनलाइन नहीं किया जाता था 6 वर्षों का खाद्य वितरण प्रणाली की दुकान पर रजिस्टर में दर्ज है यानी 6 वर्षों तक ऑफलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी द्वारा 21 कुंटल 80 किलो का लाभ ऑफलाइन खाद्यान्न प्रक्रिया अनुसार गलत तरीके से लिया गया।
मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का भी मिला लाभ
सूचना के अधिकार के अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी पेटलावद के माध्यम से कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पेटलावद द्वारा अपने पत्र मैं स्पष्ट लिखा है कि ऑनलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक समग्र आईडी कुल 6 सदस्यों के मान से प्रतिमाह 30 किलो ग्राम 7 माह तक लगभग 210 किलोग्राम राशन संजय मकोड़ को आवंटित किया गया है।
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री अन्न योजना का एक साथ 33 माह तक लिया लाभ
कोरोना काल के समय भीषण महामारी के चलते क्या बड़ा क्या छोटा हर व्यक्ति के रोजगार ठप पड़े हुए थे चारों ओर कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी हुई थी जिसका खास असर गरीब तबके के व्यक्ति तथा दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति भुखमरी जैसी हो गई थी जिसके चलते हैं केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री अन्न योजना निशुल्क अप्रैल 2020 में लागू की गई थी साथ ही मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का भी लाभ एक साथ अन्न योजना के तहत दिया जा रहा था निशुल्क योजना का फायदा सरकारी कर्मचारी ने उठाते हुए अप्रैल 2020 से लगाकर लगातार जनवरी वर्ष 2023 तक 33 माह तक गलत तरीके से शासन को गुमराह कर लाभ लिया।
क्या वसूली के साथ होगी शिक्षक पर कार्रवाई
शासन की आंखों में धूल झोंक कर जिस तरीके से सरकारी कर्मचारी ने 2013 में खुद शिक्षक होकर इसके घर से खुद कर्मचारी रही स्वर्गीय ललिता मकोड़ जो स्वास्थ्य विभाग में नर्स होकर के हर वर्ग हर व्यक्ति के काम में आने वाली महिला नर्स जिसको आज भी नगर ही नहीं आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी बड़े आदर से नाम लेकर उनके द्वारा निस्वार्थ भाव से किए गए कार्यों का सम्मान करते हैं साथ ही स्वर्गीय रामसिंह मकोड़ जो शिक्षक होकर ग्रामीण क्षेत्रों में खूब सेवाएं दी है और आज तक उनके दामन पर कोई बी दाग नहीं लगा है लेकिन सरकारी माता-पिता के सरकारी पुत्र ने अपने मां-बप को मिला सम्मान को तार-तार करते हुए सस्ते राशन के चक्कर में बची कुची इज्जत का पलीता नगर में लगा दिया है अब देखना यह होगा कि कमिश्नर तथा राजस्व विभाग के अधिकारी को दिए गए आवेदन के ऊपर शासन किस प्रकार से वसूली तथा कार्रवाई उक्त शिक्षक पर करती है
पंचायत की त्रिमूर्ति के काले कारनामे अगले अंक में…