
थांदला नगर में गली-गली बिक रही शराब परंतु आबकारी विभाग इस और ध्यान देने में असमर्थ दिखाई दे रहा हे जहां 26 जनवरी को ट्रायडे होने के बावजूद भी नगर में खुलेआम बिक रही थी शराब परंतु आपकारी विभाग गायब आपको यह भी बता दे थांदला आबकारी विभाग के आस-पास ही इंग्लिश शराब की छोटी-छोटी दुकानें खुली हुई है परंतु आबकारी विभाग अधिकारी को कोई फर्क नहीं पड़ता दिखाई देता है इन्हें तो बस ग्रामीण लोगों के यहां पर जाकर कच्ची शराब पकड़ने की इंफॉर्मेशन मिलती है परंतु इनके आबकारी विभाग ऑफिस के आसपास चल रही इंग्लिश शराब की दुकानें इन्हें नहीं दिखाई देती ऐसा क्यों यह तो बहुत सोचने वाला विषय है इंग्लिश शराब माफियाओं के साथ आपकारी अधिकारी मिल कच्ची शराब पर केस बनाकर ग्रामीणों को भी इंग्लिश शराब पीने में धकेल रहे हैं जहां 26 जनवरी को ट्राईडे घोषित किया गया है परंतु सिर्फ ड्राईडे नाम का ही रह गया है शराब ठेकेदार द्वारा 1 दिन पहले ही दुकान से शराब नगर में व आसपास ग्रामीण अंचलों में सप्लाई करदी गई जिसकी सूचना भी विकास वर्मा को दी गई परंतु उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई एक्शन नहीं लिया गया
यहां पर किसी प्रकार की भी आबकारी विभाग की कोई व्यवस्था है नहीं दिखाई देती है आबकारी विभाग बस नाम का ही रहग्या है साथ ही आबकारी विभाग अधिकारी को शराब माफियाओं ने खरीद रखा हे जिस कार्ड आबकारी अधिकारी सरकार की नौकरी का नाजायस फायदा उठा रहे हे इन अधिकारियों पर सक्त कारवाई होना जरूरी है
बस इन्हें सरकारी सैलरी मिलती जाती हे जब हमने आपकारी विभाग अधिकारियों से बात करनी चाहिए तो विकास वर्मा द्वारा हमें परसों के दिन बताया गया था कि हमारे द्वारा आज से ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी ढाबों से लेकर जहां-जहां इंग्लिश शराब बिकता है वहां पर हमारे द्वारा कार्रवाई की जाएगी परंतु आबकारी विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं देखने को मिली साथ ही शाम होते होते एक जगह पर शराब पीकर महिला और पुरुष इस प्रकार धुत दीखे की शराब दुकान के बहार ही बनी नाली में गिर गए और लोगों ने उन्हें वहां से निकाला ऐसी है आबकारी नीति ठेको से रात दिन गाड़ियां भर कर नगर व आस पास के गावो में सप्लाई की जाती है परंतु आपकारी विभाग को यह नहीं दिखाई देता साथ ही इन शराब माफियाओं ने झाबुआ जिले के आदिवासियों का नाम इतना खराब कर दिया गया है कि सरकार को लगता है कि झाबुआ जिले में रहने वाले वनवासी आदिवासियों द्वारा अधिक मात्रा में शराब पी जाती है परंतु ऐसा नहीं है शराब माफियाओं द्वारा इन आदिवासियों के नाम पर अधिक शराब बुलाकर गुजरात में सप्लाई की जाती है और इन्हें अपनी शराब की खपत बताने के लिए झाबुआ जिले में रहने वाले ग्रामीण आदिवासियों का नाम भी खराब किया जा रहा है और जहां ग्रामीण अंचलों में मवे की शराब बनती है वहां पर बेधड़क आबकारी अधिकारी पहुंच जाते हैं क्या बात है आपको यह भी बता दें कि थांदला शराब दुकान पर ना ही किसी प्रकार की रेट लिस्ट लगी है नाही शराब दुकान संचालक किसी भी व्यक्ति को स्लिप नहीं देते हैं साथ ही किस प्रकार आबकारी अधिकारी विकास वर्मा ठेकों पर जाकर स्टोक चेक करते हैं किस प्रकार वहां का माल मिलाते हैं या नहीं मिलाते हैं उन्हें तो वहां से मिलने वाली मोटी कमाई से मतलब रहता है और झाबुआ में बैठे अधिकारी को भी कोई मतलब नही उनके पास भी उनका हिस्सा पहोचता रहता हे जिस कार्ड झाबुआ में पदस्थ अधिकारी भी शायद इस कार्ड शराब माफियाओं पर और अपने निचले अधिकारियो पर भी कोई ध्यान नहीं देपाते थोड़ी तो शर्म कर लेते
*क्या बोले आपकारी अधिकारी*
जब हमने आबकारी विभाग अधिकारी *विकास वर्मा* से बात की तो उनके द्वारा हमें कहा गया कि कहां पर बिक रही शराब मुझे भी बताएं मैंने उनसे कहा कि आप एक बार थांदला में घूम के तो देखो तो आप को मालूम पड़ेगा कहां-कहां पर शराब बिक रही है और कहा नहीं बिक रही हे इसका मतलब यह हुआ कि आबकारी विभाग अधिकारियों को थांदला नगर की किसी प्रकार की कोई सुध नहीं है आबकारी विभाग के अधिकारी थांदला में निकले ही नहीं है किया कभी जांच पर जिस कारण उनके द्वारा हमें किया जा रहा है कि आप बताएं आप पत्रकार हैं कहां पर बिक रहा है शराब मेरा कहना यह है कि एक बार आप थांदला में घूम कर तो देखिए आपको खुद ही शराब की दुकानें किस प्रकार से लगी हुई है दिख जाएगी आबकारी विभाग क्या बात है और किया अधिकारी हे ऐसे अधिकारियो को नमन करने की इच्छा होती हे l