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कौन है ये नौसिखिया पत्रकार?जो थाने और एसपी कार्यालय के लगाता है चक्कर

 

@कही अनकही

भियां सभी को राम….राम….लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ….भियां न तो मैं काला हुं… और न काले कारनामें करता हुं… इसलिए भियां ठोक बजाकर लिखता हुं…..भियां इन दिनों एक नौसिखिया पत्रकार…खुब उधम मचा रिया था… और भियां वो केते है नी अधजल गगरी छलकत जाय…वैसेईज भियां अधुरे ज्ञान में अपने आप को भोत बडा समझने लग गिया….और अपने आप को कार्यक्रमों में जाकर आज तक का पत्रकार बिता रिया है…भियां पुलिस कप्तान गिये तो नए कप्तान आए…और केता है अपने को तो पेलेईज पता था कि ये कप्तान आ रिये है…और एक दिन कप्तान के कार्यालय गिया और फोटु खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया और फिर पुलिस पर रोब झाडने लग गिया…भियां कई बार जब पुलिस ढाबों पर कार्रवाई करने गी…तो ये ढाबे पर कार्रवाई नी होना चीये नी तो कप्तान को के दुंगा…कि कप्तान से मेरी अच्छी है…ऐसा कह कर ये पुलिस वालों को चमकाता रेता है….नवरात्रि में तो ये मार खाते खाते बच गिया…अब पुलिस भी क्या करें कप्तान के साथ सोशल मीडिया पर फोटु जो डाला है…भियां कुछ दिन पेले की बात बिताता हुं….जब थाने पर दरोगा साब दुसरे थे…ये होशियारी कर दरोगा के पास गिया…कि कल्याणपुरा वाले को जुए की टेबल चलानी है… आप परमिशन दो…भियां दरोगा साहब ने फटकार लगाई…और रवाना कर दिया…फिर भियां ये क्राईम वाले का पास गिया वां भी भियां इसकु ऐसी फटकार लगाई कि ये उल्टे पैर चल चल करा….भियां इसकी तो बचपन से लेकर अभी तक की कहानी अपने कुं मालुम है….ये शुरू से दलाली ही करता आ रिया है…भियां थाने के कुछ पुलिस वालों के मुंह लगा हुआ है…और इसी वजह से पुलिस कप्तान के साथ धोखा कर इसके मुंह लगे पुलिस वालों ने इसको पिटोल की वीडियों दी…इसमें भी बडा सार है…वो आपकु में बाद में बिताउंगा….भियां काले भाई साब के चक्कर में आकर ये अब लोगों को केता फिर रिया है…कि 6 महिने में तो मैं नगर पालिका को निपटा दुंगा…तो भियां एक बिता दुं….निपटाना तो दुर….पेले अपने रेले और घर को संभाल ले…बाद में बात करियो…उसके पेले तु नी निपट जाये…तेरे चक्कर में काले भाई साब नी निपट जाये…बिना हाथ पैर की बात कर रिया है…शेर की खाल ओडने से गिदड शेर नी बन जाता है…तुमको बस सबके सामने फाका लाॅजी आती है और हमको लिखने…बेवकुफ तो है जो इस फाकु की बात में आ जाते है…और…मैं तो नंगा हुं…और नंगे के नौ ग्रह बलवान होते है….ये भी के रिया हुं…न काला हुं…और न काले कारनामें करता हुं…तुम तो पेले से बेन की दलाली करते आये हो…वो बाद में सबको बिताउंगा….अभी तो के रिया हुं…नम सो तो जम सो…अकड सो तो रखड सो….ये तो ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकि है मेरे दोस्त…!अब जा रिया हुं… लेकिन भियां जाते जाते एक बात और बिता दुं…इस कार्यालय…उस कार्यालय के चक्कर लगाने…और दलाली करने से कोई बडा पत्रकार नी बन जाता…उसके लिए मेहनत करनी पडती है… कुछ सिख भैया से… जिसके सम्मान की वजह से मैं तेकु छोड रिया था…पत्रकारिता की पाठशाला है वो…और उनकी छवि धुमिल कर रिया है…एक बात के दू… अब तेरा और मेरा लफडा है…ये सुलझने वाला नी है…अब तो कहानी लमबी चलेगी…बस अभी मैं थोडा व्यस्त हुं…बाकि अगले अंक में…अब जा रिया…जय राम जी की…!

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