बस में बैठकर वापस गांव आ रही आदिवासी महिला के साथ बस चालक ने किया दुष्कर्म।

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सुनिल डामर

आज देश आजादी का 75 वां अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन इस देश के आदिवासियों की कितनी बद से बद्तर स्थिति होती जा रही है।
गुजरात के मोरबी में पलायन पर मजदूरी करने गए अपने बेटे को भुट्टे देकर बस क्रमांक जीजे 03एटी6127 बस में बैठकर थांदला के अपने गांव आ रही थी।बस चालक ने बस को रास्ते में ढाबे पर रोका,जहां पर महिला लघु शंका करने उतरी इसी दौरान बस चालक ने पीड़ित महिला के साथ दुष्कर्म किया तथा घर जाकर बताने पर जान से मारने कि धमकी दी। पीड़ित महिला ने घर पहुंचकर घटना कि आपबिति परिजनों को दी। जिसके पश्चात परिजनों ने बस के चालक को बस सहित थांदला थाने में बंद करवाया। तथा दुष्कर्म की एफआईआर थांदला थाने दर्ज की । महिला का सिविल हॉस्पिटल थांदला में उपचार चल रहा है।

अब सवाल यह है कि जिले में भी चल रही कई बसों में भी भेड़ बकरियों की तरह भरकर चलती बसों में भी आदिवासी महिलाओं के साथ दूरव्यवहार किया जाता है।क्या इस पर भी कार्यवाही होगी??

वहीं इस घटना के बाद भी जिले के जनप्रतिनिधियों एवं जिले के सामाजिक संगठनों का मौन होना लाजमी है।वही आदिवासी शौक से गुजरात मजदूरी करने जाते हैं ऐसे बड़बोले ब्यान देकर सुर्खियों में रहने वाले जनप्रतिनिधि भी ऐसी घटनाओं पर अब मौन है। शासन-प्रशासन के विकास के बड़े-बड़े खोखले दावों की पोल खोलती ऐसी घटनाओं से ही पता चलता है कि आदिवासियों का विकास हुआ है या जनप्रतिनिधियों ने खुद का विकास किया।

कब रूकेगा पलायन…?

आदिवासी अंचल में विकास का ढींढोरा पीटने वाले जनप्रतिनिधियों को रेलवे स्टेशन,बस,स्टेंड आदि पर जाकर देखना चाहिए।वर्तमान में मजदूरी के लिए पलायन पर जा रहे हैं।जिन्हें बसों,ट्रेनों में भीड़ देखी जा सकती है।यही भीड आपके किए गए विकास के खोखले दावों की पोल खोल रही हैं।पलायन पर जाने से आदिवासी अंचल के पुरे-पुरे गांव खाली हो गए। वहीं माता पिता के साथ ही स्कूली बच्चे पलायन पर चले गए।जिसे स्कूलों में भी उपस्थित कम हो गई।
पलायन के दौरान ही अधिकांश आदिवासीयों के साथ शोषण, अत्याचार,दुष्कर्म जैसी घटनाएं होती हैं।लेकिन इस पर ना तो कभी जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया ना ही शासन-प्रशासन का।

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