
भियां सभी को राम राम… लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ… भियां वो केते है नी गांडु भपकी… और गां… फटे सबकी… ऐसाईज एक दल्ला है… उसकी आज में आपकु एक कहानी सुनाने जा रिया हुं.. भियां कहानी है… कोई अपने ऊपर ना ले… और ले जो वो जाने… भियां ये एक ऐसी कहानी है… जो एक दल्ले भाई और उसकी जी की है… बिल्कुल हनी ट्रैप जैसी… दोनों मिल कर मुर्गो को दाना डालते है… और फिर लुटते है…! तो भियां सुनो कहानी… भोत पेले की बात है… मैं एक अखबार में काम कर रिया था… अब भियां गुटखा खाने की शुरू से आदत है… ऑफिस वातानुकुलीत थी… तो गुटका बाहर जाकर खाना पड़ता था… तो भियां मुंह में गुटका फंसा कर बाहर बैठे बैंठे जुगलबंदी करता रेता था… भियां एक दिन ऐसेईज जुगलबंदी करते करते घुमने लग गिया… तो भियां एक ऑफिस से मुझे कुछ आवाज आने लगी… आवाज अंग्रेजी पिक्चर की तरह थी… तो भियां मैंने किया आखिर माजरा क्या है… तो मैं भियां पास में गिया और सुनने लगा… भियां अंदर से पर्दे लगे हुए थे… बस एक थोडा सा पर्दा खुला था… वां से देखा… तो अंदर एक अलग ही पिक्चर चल री थी… बिल्कुल अंग्रेजी की तरह… मैने पर्दे के गेप से देख… तो भियां एक अधेड़ उम्र का आदमी… एक कम उम्र की लड़की को गोद में बैठाकर घचाघच… या फिर यूं कहे टुंकुर टुकुर लगाई लगाई कर रिया था… मैं पिक्चर देख ही रिया था कि तभी अचानक से एक आवाज आई… क्या भियां क्या कर रे हो वां… इधर आ.. पिछले पलट कर के देखा तो ओर कोई नी… मेरा सेठ था… मैं उनके पास चला गिया… मैने किया क्या हुआ… तो सेठ बोलने लगा… आज इस खबर को लीड बना ले… अच्छी खबर है… मैने किया ठिक है… अचानक से सेठ केने लगा… तु पसीने पसीने क्यों हो रा… मैने किया कुछ नी… तो वो बोलने लगे.. कुछ तो है… तो मैने किया… भियां अंदर एक अंग्रेजी पिक्चर चल री थी… तो सेठ केने लगा… यां तो ये रोज की बात है… इस छोरी का पुरा घर येईज को चला रिया है… इसका भाई तो छोड़ने आता है… और ले जाता है… मैंने किया अच्छा… अपन भी जवान थे..़और ऊपर से पत्रकार… तो लग गिया खोजबिन के लिए… तब पता चला भियां ये तो अलग ही मामला है… भाईज अपनी जी को परोस रिया है… ये दल्ला अपनीईज जी को उस अधेड़ के घर छोड़ने लेने जाता था… उसको ये अंकल केते थे… भियां ये अंकल इस दल्ले और उसकी जी को इंदौर लेकर जाता था… तब ये दल्ला एक अलग कमरे में और इसकी जी और वो अंकल अलग कमरें में रेते थे… अब अलग कमरे में… क्या होता होगा… ये आप लोग भी जान रिये होंगे… भियां इन दोनों भाई बेन की अच्छी जोड़ी थी… इन्होने इंदौर में भी अंकल उर्फ जीजा के जैसे मुर्गे फंसा रखे थे… और ये दल्ला भाईज ही उन मुर्गो के पास छोड कर आता है… अब जिसको ये दल्ला अंकल अंकल केते था… उसको ही जीजा बना लेता… बेचारे एक सीधे साधे लड़के को फंसाकर… अपनी जी को उसके गले में फांद दिया … भियां इस दल्ले की और भी बडी रोचक कहानी है… इसका बाप काम पर जाता नी.. देवालयों पर इसकी नजर है.. एक बार देवालयों को लेकर इसका झगड़ा भी हुआ.. जिन दोस्तों के साथ ही भजन करने जाता था उनके सामने भी ये बड़ा बन रिया था तो वा से भी इसकू भगा दिया.. अब एक और देवालय पर नजर है.. इसकी पत्नी की भी… बड़ी रोचक कहानी है.. वो प्रेमी से किया आखरी वादा ये सब मैं आपकु अगले अंक में बिताउंगा…।
अब जा रिया… जय राम जी की… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… सुन बे दल्ले… तु परिवर्तन की बात कर रिया है तो… एक बात तु तो वैसे भी जी की चु… बेच बेच… के दलाली कर बडा हुआ है… तेरेकु क्या परिवर्तन कराउंगा… ल तू लायक ही नहीं है.. तू जो देवालयों पर नजर रख कमा रिया है ऐसी दुकानदारी हमारे याँ नी चलेगी.. वैसेईज तु पापी है… दल्ले… और तु अपने आप को बिता रिया है सेवक… तो बता कितनी सेवा की… देख बे दल्ले अभी भी के रिया हुं… अभी भी समय है गलती स्वीकार ले… नी तो इतना पेलुंगा… कि डिपरेशन में चला जायेगा… तु मेकु अभी नी जानता… अच्छी अच्छी बारातें भगा ली है… वो डंडा तेरे पिछवाड़े में घुसाकर गोल गोल नी घुमाया तो मेरा नाम भी भियाँ नी… अब जा रिया… जय रामजी की…!