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गोबर आधारित उत्पादों से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल कलेक्टर ने गौशाला संचालकों की बैठक लेकर की चर्चा इंदौर स्थित श्री अहिल्या माता गौशाला में कराया जाएगा एक्सपोजर विजीट

राज्य शासन द्वारा घोषित कृषि कल्याण वर्ष 2026 के उद्देश्य के अनुरूप गौसंवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर नेहा मीना की अध्यक्षता में जिले में संचालित समस्त शासकीय एवं निजी गौशालाओं के उत्थान, विकास तथा उनके संचालन से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने तथा नवीन तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि गौशालाएं केवल गौवंश संरक्षण का केंद्र ही नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्व-रोजगार का सशक्त माध्यम भी बन सकती हैं। इसके लिए गौशालाओं में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाए, जिससे गौशालाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हों। बैठक में अवगत कराया गया कि जिला प्रशासन द्वारा इंदौर स्थित श्री अहिल्या माता गौशाला से समन्वय स्थापित किया गया है। इस गौशाला में गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण तथा गौशालाओं के सफल संचालन के कई नवाचार किए जा रहे हैं। जिले के गौशाला संचालकों को वहां एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा, जिससे वे इन नवाचारों को समझकर अपने-अपने क्षेत्रों में लागू कर सकें। कलेक्टर ने गौशाला संचालकों से कहा कि गौशालाओं में गोबर से बनने वाले उत्पाद जैसे गौकाष्ठ, कंडा, गोनाइल, जैविक खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाए। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है तथा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि गौकाष्ठ और कंडे जैसे उत्पादों का उपयोग धार्मिक कार्यों एवं अंतिम संस्कार में लकड़ी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

कलेक्टर ने पशुपालन विभाग को निर्देश दिए कि गौशालाओं में तैयार होने वाली जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट को किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग के माध्यम से समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा मिल सके। इसके लिए कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्र को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने जिले में संचालित अपंजीकृत गौशालाओं के पंजीयन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के लिए उपसंचालक पशुपालन विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि पंजीयन से गौशालाओं को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा तथा उनके संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।.बैठक में मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के अंतर्गत चयनित ग्राम रायपुरिया, कल्याणपुरा एवं नौगांवां में स्थित गौशालाओं को योजनान्तर्गत विकसित कर आत्मनिर्भर मॉडल गौशाला के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए इन गौशालाओं के समग्र विकास, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आय के स्थायी स्रोत विकसित करने हेतु विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा। कलेक्टर ने शासकीय गौशालाओं के संचालन में आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की स्व-सहायता समूहों की दीदियों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि समूहों के माध्यम से गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन की व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। बैठक के दौरान उपस्थित गौशाला संचालकों से उनके संचालन से संबंधित समस्याओं एवं आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर उनका त्वरित एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि गौशालाओं का संचालन सुचारू रूप से हो सके तथा उनके विकास एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में आवश्यक कार्यवाही समयबद्ध रूप से की जा सके। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जितेन्द्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रतिपाल सिंह महोबिया, उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. ए एस दिवाकर, संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं गौशाला संचालक उपस्थित रहे।

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