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भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय दिवस के भव्य आयोजन के साथ आदिवासी यात्रा का शुभारंभ। ज़मीन की आवाज़ सुनना, लोगों से सीखना: सात राज्यों में स्वदेशी यात्रा – श्रवण अभियान शुरू सात राज्यों की एक यात्रा जो स्वदेशी आवाज़ों को बुलंद करेगी और भारत के आदिवासी समुदायों के ज्ञान का जश्न मनाएगी।

दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ 

आलीराजपुर जिले के ग्राम पंचायत रोशिया में क्रांति सूर्य भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर आज आदिवासी यात्रा का शुभारंभ हुआ। जिसमें आदिवासी समुदाय के विभिन्न संगठन के पदाधिकारी , वरिष्ठ लोग, समाजिक कार्यकर्ता , संगठन लीडर, प्रतिनिधि सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे। ओर यात्रा की सराहना की तथा इस यात्रा में प्रतिभाग कर सफल बनाने का संकल्प लिया ।बिरसा मुंडा जयंती और जनजातीय गौरव दिवस की पूर्व संध्या पर, आत्मशक्ति ट्रस्ट ने राष्ट्रीय कुपोषण निवारण संघ (एनसीसीएम) और जमीनी स्तर के सहयोगियों के सहयोग से, सात आदिवासी बहुल राज्यों – ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्वदेशी यात्रा – श्रवण अभियान शुरू किया। 15 नवंबर, 2025 से 15 मार्च, 2026 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य स्वदेशी आवाज़ों को गहराई से सुनना और सामुदायिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना है जो भारत के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक लचीलेपन को आकार देता है। कहानी सुनाने, पीढ़ियों के बीच संवाद, वन भ्रमण, कला-आधारित शिक्षा और पारंपरिक खेलों के माध्यम से, यह यात्रा 300 से ज़्यादा आदिवासी समुदायों तक पहुँचेगी और ऐसे ज्ञान ढाँचों का सह-निर्माण करेगी जो स्वदेशी ज्ञान और जीवन जीने के तरीकों का सम्मान करते हैं।

ज़मीन की आवाज़ सुनना, लोगों से सीखना”

स्वदेशी यात्रा पहचान, पुनर्स्थापन और नवीनीकरण की एक यात्रा है, जो आदिवासी समुदायों को भारत की स्थिरता की कहानी के केंद्र में रखती है। गाँव चौपाल – ज्ञान की कहानियाँ, वॉइस रिपोर्ट, बिना खेती वाले खाद्य प्रदर्शनियाँ, बीज विनिमय और जलवायु एवं जैव विविधता पर वन भ्रमण के माध्यम से, यह अभियान जीवंत परंपराओं का जश्न मनाता है और उनका दस्तावेज़ीकरण करता है।

सामुदायिक भित्ति चित्र, स्वदेशी खेल और रील फ़ॉर चेंज जैसी रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ स्थानीय आवाज़ों और पीढ़ियों के बीच सीखने को बढ़ावा देती हैं। ये सभी प्रयास मिलकर आवाज़ों का एक राष्ट्रीय भंडार तैयार करेंगे, जो भारत के आदिवासी जीवन की गहराई, विविधता और पारिस्थितिक ज्ञान को प्रतिबिंबित करेगा।

बिरसा मुंडा की जयंती पर यह शुभारंभ महान आदिवासी नेता को सम्मानित करता है और जनजातीय गौरव दिवस की भावना को सुदृढ़ करता है, जो भारत के स्वदेशी समुदायों की शक्ति, गौरव और नेतृत्व का जश्न मनाता है।

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