दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
जिले में बीते दो सप्ताह से जिला प्रशासन गहरी नींद में याने की कौमा में चला गया है ।धीरे धीरे बंगालियों की मौत की दुकानें आज गई है और खुले आम इलाज चालू पूरा जिला प्रशासन उनकी मौत की दुकानों के आगे से दिन भर में पांच से छः बार गुजरता होगा फिर भी उनकी दुकानों को देखकर भी अनदेखा कर रहा है क्या जिला प्रशासन को रतौंधी की बीमारी लग गई है जिसने दिखता तो है पर नहीं दिखने का ढोंग किया जाता है ।।वैसे ही हाल जिला प्रशासन के है ।। आज अलीराजपुर जिले के हर जवाबदार अधिकारी जो इस अवैध धंधे को मौन समर्थन दे रहा है।

बीते एक दो सप्ताह पूर्व जबरजस्त कार्यवाही के मूड में था जैसे सिंघम फिल्म में हीरो ने अवैध माफियाओं के खिलाफ जबरजस्त कार्यवाही की थी और पूरी माफियाओं गैंग में हड़कंप मच गया लेकिन वो हीरो तो ईमानदार था लेकिन हमारे जिले का जिला प्रशासन कैसा है यह कहने की जरूरत ही नहीं क्योंकि बीते दो सप्ताह से जो जिला प्रशासन और मेडिकल और कुछ फर्जी बंगालियों की लक्ष्मी से खरीदे गए चमचमाते कुर्ते वाले छूट भैय्या नेताओं की तिकड़ी ने बंगालियों की लक्ष्मी से ऐसी बिछात बिछाई कि पूरा जिला प्रशासन फिर से अवैध क्लीनिकों और हॉस्पिटलों के मायाजाल में उलझ गया है जिसमें किसी भी आम नागरिकों की कोई सुनवाई ही नहीं कागजों में लिखकर ज्ञापन देने वालों और समाचार पत्रों में सच्चाई लिखने वाले लोगों की आवाज को भी चंद कागज के रुपयों के लिए जिला प्रशासन रहा है ।शर्म तब आती है कि जिला प्रशासन अनपढ़ फर्जी डॉक्टरों और भैंस का दूध निकालते निकालते बने डॉक्टर द्वारा शासन की कार्यवाही को धता बताकर फिर से स्टोरॉयड जैसे केमिकल का प्रयोग और इलाज में उसका स्तेमाल कर दिया । और स्थानीय प्रशासन के अलावा जिनकी यह जवाबदारी है उन्होंने भी गांधारी की तरह अपनी आँखें होते हुवे भी काली पट्टी बांध ली है ताकि कौरवों के पापों की तरह इनके किए पाप को भी अनदेखा किया जा सके । आगे इसी तरस कड़वे शब्दों से जिला प्रशासन की नाकामी को उजागर करता रहेगा वॉयस ऑफ झाबुआ आप अगले अंक में पढ़ सकेंगे ।।