रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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पेटलावद। श्री भैरवनाथ मवेशी मेला प्राचीन होकर पेटलावद में वर्षों से लगते आ रहा है, उक्त मेले में झूला चकरी व्यापारी नगर परिषद को शुल्क देकर वर्षों से झूला चकरी लगा रहे हैं। किंतु इस वर्ष नगर परिषद द्वारा ठेका पद्धति के माध्यम से झूला चकरी लगाने को लेकर निर्णय लिया है। जिसके चलते गरीब झूला चकरी लगाने वाले व्यापारियों पर संकट आ गया है। लाखो रुपए का भाड़ा खर्च कर झूला व्यापारी अपने झूलो को लेकर बामनिया मेले में आए थे और हर वर्ष की तरह बामनिया मेला समाप्त होने के बाद पेटलावद मेले में झूला चकरी लगाए जाना था। किंतु सूत्रों अनुसार ज्ञात हुआ है कि नगर परिषद द्वारा ठेका पद्धति के माध्यम से एक व्यक्ति को ठेका दे दिया गया है, जिस वजह से ठेकेदार के अनुसार ही मेले में झूला चकरी लगाए जाएंगे। ऐसे में जो हर वर्ष मेले में झूला चकरी लगाते हैं। उन्हें इस बार मेले से बेदखल कर दिया गया है। मेले में झूला चकरी लगाने वाले व्यापारियों पर आर्थिक संकट भी आ गया है।
व्यापारी इस कड़कड़ाती ठंड में अपने साथ महिलाएं एवं छोटे मासूम बच्चों को लेकर इस उम्मीद के साथ आए थे कि उन्हें पेटलावद भैरवनाथ मवेशी मेले में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी झूले चकरी लगाने का मौका मिलेगा। किंतु नगर परिषद के ठेका पद्धति वाले निर्णय ने उन्हें हताश और निराश कर दिया है।
मेले में आए व्यापारियों ने जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है की पेटलावद मेले में ठेका पद्धति को समाप्त किया जाए और हर वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी मेले में झूला चकरी लगाने की अनुमति दी जाए। अन्यथा व्यापारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।