रिंगनोद:- (योगेश गवरी) इस बार 9 की बजाय 10 दिन तक माता की आराधना होगी पंडित गिरिराज व्यास ने बताया क्योंकि नवरात्र की एक तिथि की वृद्धि हो गई है। खास बात यह है कि इस बार नवमी की पूजा और विजयादशमी पर्व भी एक ही दिन मनाया जाएगा और दशहरे के अगले दिन होगा। आदि शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर से शुरू होगा। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक चलेगा। मां दुर्गा जब भी पालकी में विराजमान होकर आती है तो प्रजा में सुख-समृद्धि व वैभव की वृद्धि तो होती है लेकिन असामाजिक रोग पीड़ा बढ़ाती है। इस बार नवरात्र पर्व 10 दिन की होने से श्रेष्ठ माना गया है। इस बार 5 व 6 अक्टूबर को तृतीया तिथि रहेगी। इस कारण नवरात्र का समापन 12 अक्टूबर को होगा। इसी दिन दशहरा भी मनाया जाएगा। तृतीया तिथि 5 अक्टूबर को प्रातः 531 बजे से शुरू। से शुरू होकर अगले दिन 6 अक्टूबर को सुबह 7.50 तक
होगी ये तिथि दो दिनों के सूर्योदय तृतीय तिथि का पूजन होगा। घट स्थापना मुहूर्त नवरात्रि पर 3 अक्टूबर को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 6.14 से लेकर 7.21 बजे तक रहेगा यानी 1 घंटे 6 मिनट तक घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.45 से लेकर 12.33 बजे तक रहेगा। दोपहर
सवारी किस पर आएगी यह वार से तय
नवरात्र में 5 से 8 अक्टूबर तक सर्वार्थ सिद्धि और योग का संयोग रहेगा। इसके बाद 11-12 अक्टूबर को भी यह योग रहेंगे, जो खरीदारी तथा पूजा-अनुष्ठान के लिए शुभ फलदायी होंगे। नवरात्र में मां आदि शक्ति का भूलोक पर आगमन होता है। इस बार मां का आगमन पालकी में होगा। यह गुरुवार का दिन होगा। पुराणों में वर्णन है कि प्रतिपदा पर रविवार या सोमवार हो तो माता की सवारी हाथी, मंगलवार या शनिवार हो तो अश्व, गुरुवार या शुक्रवार हो तो डोली या पालकी और बुधवार हो तो वाहन नाव होता है।अति प्राचीन मां नागेश्वरी मंदिर में माता दिन में तीन रूप का धारण करती है सुबह बालिका का रूप दोपहर में युवावस्था का रूप और शाम के समय वृद्धावस्था का रूप धारण करती है । 3 अक्टूबर गुरुवार को नवरात्रि में मां नागेश्वरी का विशेष श्रृंगार होगा। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना एवं ज्योति प्रज्वलित होगी। नवरात्रि पर्व 9 दिनों तक माता की आराधना के रूप में मनाया जा रहा है। महाष्टमी को हवन होगा। नवरात्रि में बड़ी संख्या में । कन्या भोज का आनंद लेंगे
सुबह नवमी पूजन, शाम को शस्त्र पूजा की जाएगी
नवरात्र की नवमी तिथि 11 अक्टूबर को दोपहर 12.07 बजे आएगी, जो 12 अक्टूबर को सुबह 10:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि आएगी, इसलिए 12 अक्टूबर को ही सुबह नवमी का पूजन होगा और नवरात्र का समापन
इसी दिन माना जाएगा। शाम को दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। साथ ही दशहरा पर शस्त्र पूजा भी इसी दिन होगी