सुनिल डामर
धार जिले के रिंगनोद स्थित जनजातीय सीनियर आदिवासी बालक छात्रवास में रहकर कक्षा 12 में अध्ययन कर रहे दो आदिवासी छात्रों की करंट लगने से मृत्यु हो जाने को लेकर,आज दिनांक 27 सितम्बर 2024 को भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने आईएएस आफिसर एसडीएम पेटलावद तनुश्री मीणा को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा । इस दौरान छात्रों ने रिंगनोद की इस घटना पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
ज्ञापन में दर्ज बिंदुओं में बहुत ही सटिकता के साथ भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने आपनी मांग ओर पीड़ा से राज्यपाल के नाम संदेश भेजा है। ज्ञापन में लिखा गया है कि धार जिले के रिंगनोद स्थित जनजातीय सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास में गत 25 सितम्बर 2024 बुधवार को सुबह 07:30 बजे जो दुर्घटना घटित हुई है वह छात्रावास में पदस्थ छात्रावास के अधिक्षक की घोर लापरवाही के कारण हुई। इस दुर्घटना में कक्षा 12 के दो आदिवासी छात्रों आकाश और विकास कालकवलित हो गए हैं।
मृतक दोनों छात्र होस्टल अधिक्षक के कहने पर छात्रावास स्थित भूमिगत पानी की टंकी जिसमें गाद ,मिट्टी तथा कंजी जमा हो गई थी को सुबह -सुबह अंदर उतरकर साफ कर रहे थे ।इसी दौरान विद्युत का करंट लगने से दोनों ही छात्रों की दु:खद मृत्यु हो गई।

भील प्रदेश विद्यार्थी ने लिखा कि सरकार ओर शासन की शैक्षणिक व्यवस्था के उपर विश्वास कर , दोनों छात्र रिंगनोद के उस छात्रावास में यह उद्देश्य लेकर प्रवेशित हुए थे कि हम पढ़-लिखकर अपने भावी भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे । लेकिन हॉस्टल अधीक्षक की कर्त्तव्य मूढ़ता के कारण कालकवलित हो गए।
तथा इस ह्रदय विदारक दु:खद घटना के बाद शासन-प्रशासन ने भी होस्टल अधिक्षक को निलंबित कर एवं मृतक दोनों छात्रों के पीड़ित परिवारों को दो – दो लाख रूपयों का मुआवजा देने की घोषणा कर इतिश्री कर ली ।
लेकिन सवाल यह है- कि ठेठ ग्रामीण अंचल से निकलकर दोनों बुद्धिजीवी नौनिहालों की जान की कीमत सरकार ने केवल 2 /2 लाख रूपया ही आंकी ?
सवाल यह बनता है कि वे दोनों ही छात्र निर्धन ओर आदिवासी वर्ग परिवार से थे ,क्या इसलिए उनकी जान की कीमत मुआवजा के रूप में केवल 2 लाख रूपया ही आंकी गई ?
देश का प्रत्येक नागरिक देश का मानव संसाधन होकर देश की अनमोल धरोहर है।वे दोनों नौनिहाल बुद्धिजीवी छात्र पढ़-लिखकर राष्ट्र सेवा के किस आयाम को प्राप्त करते यह विचारणीय बिंदु है।
क्योंकि आदिवासी जनजाति के गौंड समुदाय से सम्बंध रखने वाले मध्यप्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री आदिवासी हैं। ज्ञापन में प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित करते हुए लिखा की आप महामहिम राज्यपाल महोदय आदिवासी वर्ग से ही हो । तथा देश के सर्वोच्च पद पर आसीन महामहिम राष्ट्रपति भी आदिवासी जनजाति वर्ग से ही हैं।हो सकता कि वे नौनिहाल होनहार बुद्धिजीवी छात्र कालकवलित ना होते तो , आप जिन पदों पर आसीन हो एसे किसी पद पर प्रतिष्ठित होकर राष्ट्रसेवा के नये कीर्तिमान स्थापित करते ।
अतः इस दु:खद दुर्घटना में मृतक दोनों बुद्धिजीवी छात्रों के पीड़ित परिवारों को 1 / 1 करोड़ रूपया मुआवजा के रूप में जारी किया जाए।
तथा मध्यप्रदेश राज्य अन्तर्गत शिक्षा विभाग ओर जनजातिय कार्य विभाग के सभी आवासीय विद्यालयों ओर छात्रावासों कि भौतिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाना सुनिश्चित करें ।ताकि भविष्य में फूड पाइजनिंग, बिजली से तथा शारीरिक शौषण की कोई अवांछनीय दुर्घटनाऐं घटित होने की पुनरावृत्ति,शासन के इन शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में न हो सके ।
भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के जिला संयोजक पवन मैड़ा , ब्लाक सचिव पेटलावद चिरायु देवड़ा , सदस्य ,मोहन अरड़ ,रानी भूरिया, प्रताप गरवाल , मोनू निनामा, कांतिलाल मैडोना ,वज्जू गरवाल,धुमसिंह निनामा , कांतिलाल मईड़ा तथा भील ओटोनोमस कौंसिल के जिला संयोजक संदीप वहुनिया आदि सभी सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी ओर कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।ज्ञापन का वाचन भील प्रदेश जिला संयोजक पवन मैड़ा ने किया।