Homeअलीराजपुरग्राम पंचायतों में किसी भी योजना में रोजगार का काम नही है?

ग्राम पंचायतों में किसी भी योजना में रोजगार का काम नही है?

 

दिलीपसिंह भूरिया

जिले में जब आम लोगो और जिले के किसी भी नागरिक के लिए रोजगार के कोई भी काम नही है तो फिर अधिकारी और कर्मचारी विभागो में बैठकर क्या सिर्फ वेतन और चाय नास्ते के लिए है ।जिले की जिस भी पंचायत में देखो आजादी से लेकर आज तक सड़के बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य जेसी मूलभूत सुविधाएं उट के मुंह में जीरे के समान है ।अलीराजपुर जिले में आदिवासी जनसंख्या का घनत्व इतना ज्यादा है।की हर घर में चार से पांच व्यक्तियों को रोजगार की जरूरत है लेकिन राज्य शासन और जिला प्रशासन जिले के भाजपा कांग्रेस के राजनेता जिनमे सांसद और विधायक जैसे लोग भी अपने जिले में आम लोगो को रोजगार नहीं मिल रहा है उसकी कोई भी चिंता नहीं है क्योंकि उनकी तिजोरियां तो सोने चांदी और रूपयो से भरी पड़ी है जिले के जिस भी राजनेतिक पार्टी के नेताओ को देखो उनकी स्थिति किसी राजा महाराजा जेसी ही है जो राजनेता अलीराजपुर में कभी अपने खेत में काम करके दो वक्त की रोटी तक नही जुटा पाता था वो आज महंगी गाडियां बड़े बड़े मकानों और कई कई अकड़ जमीनों के मालिक है उनके परिवारों के हर सदस्य के काम करोड़ों रुपयों की संपति दर्ज है जिले में इन राजनेताओं ने ऐसा क्या काम किया जिससे इनकी कोड़ी की कमाई में भी करोड़ों की संपत्ति हो गई जबकि आजादी से लेकर आज तक जिले के हर आदिवादि किसान और मजदूर रोजाना रोजगार के लिए खेती और मजदूरी दिन रात करते है लेकिन उनकी स्थिति आज भी मजदूरी और खेती कर सके वैसी ही है ।फिर विधायक सांसद सरपंच जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य जनपद पंचायत अध्यक्ष और सदस्य नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षदों की कमाई करोड़ों रुपयों में केसे पहुंच गई ।जिले में राज्य शासन और केंद्र शासन से जितनी भी योजनाएं या कार्य स्वीकृत होते है और उनकी जितनी भी राशि जिले में आती है उस राशि के अनुरूप कोई भी काम नही किया जाता जिस भी योजना के क्रियान्वयन में जो भी अधिकारी और कर्मचारी को लगाया जाता है या ठेकेदार के द्वारा कार्य किया जाता है जिले की समस्त योजनाओं में जब तक भ्रटाचार ना हो तब तक जिले के नेता अधिकारी और कर्मचारी जनप्रतिनिधि और ठेकेदार के द्वारा पहले ही कर लिया जाता है योजनाओं की राशि में से जिले के हर विभाग और हर नेताओ और जनप्रतिंनीधियो का कमीसन पहले से ही तय है ।किसी भी योजना की राशि से कार्य होने से पहले ही राशि 30%से लेकर 40% नेताओ और अधिकारियों और कर्मचारियों में कमिसन के रूप में बाट देने के बाद बची कूची राशि से काम की शुरुआत होगी तो कोई भी ठेकेदार दिल से कोई भी काम नही करेगा और करेगा तो भी वह भी घटिया किस्म की सामग्री और घटिया तरीके से क्योंकि उसका सारा लाभ या कमाई तो नेता और अधिकारी और जिले के जनप्रतिंनीधी द्वारा भ्रष्टाचार कर शहद के रूप में सदा सदा के लिए चाट लिया जाता है ।फिर कोई भी योजना पूर्व होने का सवाल ही नहीं उठता जिले में जितनी भी योजनाएं अब तक आई या वो अधूरी है या पूर्ण भी हुई है तो उस योजनाएं के भ्रष्टाचार की निशानी आज भी उसकी दुर्दशा से देखी जा सकती है ।जनता रोजगार के लिए आज भी गुजरात राजस्थान ,महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर चले जाते है क्योंकि जिले में रोजगार तो सिर्फ कागजों में ही मिलता है वो भी भ्रष्टाचार करके ही ।

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