क्या कंडक्टर से मंडल अध्यक्ष का सफर पेसो के दम पर किया?

2005

@Voice ऑफ झाबुआ        @Voice ऑफ झाबुआ

भारतीय जनता पार्टी संगठन एक ऐसा संगठन है जिसमे हर कोई कार्य करना चाहता हे,क्योंकि भाजपा संगठन सेवा और समर्पण के भाव के साथ सबका साथ और सबका विश्वास के मूल मंत्र को लेकर चलने वाली विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भी है,भारतीय जनता पार्टी में ही रंक से राजा और राजा से रंक बनने के सेकडो उदाहरण देखने को मिल जायेगे,भारतीय जनता पार्टी ही एक ऐसी पार्टी हे जिसका साधारण कार्यकर्ता भी देश का प्रधानमंत्री बन सकता है और पन्ना प्रमुख देश का गृह मंत्री बन सकता है ये सब भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है,पर ये सब उदाहरण कर्मठ,सक्रिय और निस्वार्थ भाव वाले व्यक्तियों के है?जो अपने दम और कार्य से खुद और संगठन को ऊंचाई पर पहुंचाया है?किसी कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले शंकर ने नही?कुछ ऐसा ही मामला पेटलावद निकाय चुनाव में देखने को मिला हे की जो भाजपा की जमीन पर खड़ा होकर खुद को मजबूत किया और मान सम्मान मिला हे को भूल गया और फिर भाजपा का बागी बन गया?पर वो बोलते है ना के कुत्तों को घी हजम नही होता तो उल्टी करता ही है?शंकर जो पूर्व में कंडक्टर था किसी बस में और वही शुरुवाती समय में कांग्रेस की पृष्ठभूमि से राजनीति करने वाले कांग्रेसी शंकर को जब भाजपा के जिला नेता का हाथ थामा तो पत्नि को थोक भंडार मे उपाध्यक्ष पद दिलाकर राजनीति शुरू कर पार्षद,मंडल अध्यक्ष जेसे पद पर सुशोभित किया वही मंडल अध्यक्ष रहते हुए अपने दोगले पन के चलते हुए प्रकाश मुलेवा को नगर परिषद में उपाध्यक्ष को एक तिलकधारी सहित अन्य को वोट दिलवाकर भाजपा की माया राजू सतोगिया के खिलाफ गया उसके बाद शंकर राठौड़ और प्रकाश मुलेवा को पद से हटा दिया गया,स्वार्थ की राजनीति करने वाले शंकर राठौड़ ने आज फिर भाजपा के दामन को गंदा करते हुए दाग लगाया हे?वही दूसरी बार गद्दारी करते हुए फेसबुक पर भाजपा पर दाग लगाते हुए भतीजे द्वारा लिखा की कमल पर होंगी नोट की गड्डी झूठ दिखाया जायेगा,हर घर में स्वार्थ सिद्ध का फूल खिलाया जायेगा

 उक्त संदेश के साथ भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ “तेरा बाप आया” सोंग के साथ चलाते हुए भाजपा संगठन को करारा झापटा मार रहा हे?पेटलावद सहित जिले की जनता सहित भाजपा कार्यकर्ता पूछती हे की क्या पैसे के दम से शंकर राठौड़ को मंडल अध्यक्ष बनाया था?क्या शंकर राठौड़ को थोक उपभोक्ता भंडार का अध्यक्ष पैसे के बल पर बनाया था?अगर पैसे के बल पर नही बनाया तो इस संदेश का क्या अर्थ निकाला जाए?जो शंकर राठौड़ के करीबी रिश्तेदार ने डाला हे?भाजपा कार्यकर्ता तो यही पूछ रहा हे की उक्त संदेश जो भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ डाला हे और उसका अर्थ भी यही निकलता हे की भाजपा ने पेसो के दम पर ही टिकट दिया हे तो क्या थोक भंडार उपाध्यक्ष से लेकर पार्षद और मंडल अध्यक्ष का सफर भी खुद ने पेसो के दम पर किया?वही पार्टी का ईमानदार सिपाही होने का ढिंढोरा पिटने वाला अपने स्वहित के लिये इस हद तक जा सकता हैं की बार बार पार्टी के साथ दगा करने वालो को क्या पार्टी सबक सिखायेगी?पार्टी हित नही स्वहित देखने वाले शंकर की कहानी अगले अंक में…..

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