पुलिस व आबकारी विभाग की निष्क्रियता के चलते क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है, खुलेआम शराब ठेकेदार द्वारा क्षेत्र में शराब परोसने का कार्य पुलिस व आबकारी की नाक के नीचे होता रहा,
इस रिश्ते को क्या नाम दें सांठगांठ , या अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही..
ऐसा नहीं है कि अवैध शराब दुकानों की भनक पुलिस को नहीं है जबकि पुलिस की गाड़ी रात को 9:00 10:00 बजे के आसपास अवैध शराब की दुकानें ,ठाबे के सामने से निकलती है कुछ समय के लिए रूकती है और दुकान में से एक बंदा बाहरआता है कुछ बातें होती है और गाड़ी चली जाती है, आखिर सवाल यह उठाता ऐसी कौन सी बात होती है जिससे अवैध धंधे वालों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं, और सरेआम अवैध दुकानें संचालित हो रही है इजाजत मिल जाती है
पुलिस रहती अंजान…..
शराब ठेकेदार अपने गुर्गों के माध्यम से गांव-गांव शराब का अवैध सप्लाई करवाता है तथा कई अन्य शराब माफिया अपने दो दोपहिया वाहनों से अवैध रूप से शराब ले जाते हैं। बकायदा शराब माफिया पुलिस चौकी के सामने से अपने वाहन वाहनों पर शराब की पेटियां ले जाते हुए देखे जा सकते हैं फिर भी स्थानीय पुलिस मामले में अनजान है। इस तरह खुलेआम हो रहे शराब के अवैध कारोबार पर पुलिस व आबकारी विभाग के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करना संदेह के घेरे में है।