
सुरेश परिहार सारंगी
जल झूलनी एकादशी (डोल ग्यारस)आस्था व उल्लास से मनाई गयी इस अवसर पर मंदिरों से ढोल ढमाकों के साथ डोल (विमान) निकाले जुलूस में घंटे घडियालो के बीच भगवान के जयकारे गूंज रहे थे फूलों व अन्य सामग्रियों से सजे डोल जलस्त्रोतों पर पहुंचे यहां भगवान को स्नान करा कर आरती की गयी एवं प्रसादी का वितरण किया गया भक्तों ने सवैया का गान किया और भगवान को पुनः मंदिर में विराजित किया गया और भगवान को झूले में झूलाया गया