वॉइस ऑफ झाबुआ @निकलेश डामोर
भू माफियाओं को इन दिनों थांदला क्षेत्र में बडा ही संरक्षण मिल रहा है… और ये संरक्षण देने वाले कोई ओर नही सरकारी मुलाजिंम है…जो एक दुसरें पर आरोप प्रत्यारोप मढ…चांदी की चम्मच से मलाई खाते नजर आ रहे है…थांदला क्षेत्र में कई भू माफियाओं का सरकारी भूमियों पर अवैध कब्जा है जिसमें से एक माफिया है मुफज्जल जो सरकारी भूमि पर कब्जा कर बैठा है…और जांच में अवैध कब्जा पाए जाने पर भी थांदला एसडीएम और तहसीलदार साहब एक दुसरें पर आरोप मढते नजर आ रहे है…और सुत्रों का कहना है दोनों ही एक ही थाली के चटटे बटटे है और दोनों ने चांदी की चम्मच से जमकर मलाई खाई है…इसलिए तो इतना विरोध होने के बाद भी आज तक कार्रवाई नही हो पा रही है,मुफज्जल अली बोहरा द्वारा तो अवैध भूमि पर अतिक्रमण किया गया है वो भूमि पूरी सरकारी है जिसकी शिकायत सीएम हेल्प लाईन में भी कि गई। हाल ही में कलेक्टर साहब ने भी भू माफियाओं पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए मगर एसडीएम व तहसीलदार के सामने आदेश फिके पड गए…अब झाबुआ दौरे पर आए प्रभारी मंत्री जी को पत्रकार ने उक्त भूमि को लेकर आवेदन कि उक्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाये… पत्रकारों ने ये भी आवेदन में कहा कि अगर कोई गरीब की दुकान या घुमटी होती तो थांदला प्रशाशन उसे तुरंत हटाने पहुंच जाता है मगर उक्त भूमि जो जांच में भी शासकीय पाई गई फिर भी तहसीलदार साहब द्वारा कोई कार्रवाई नही करना पूरे प्रशासनिक अमले को संदेह के घेरे में ला रही है। ऐसे प्रभारी मंत्रीजी द्वारा उक्त भूमि को लेकर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मगर अभी भी तहसीलदार साहब उक्त भूमि पर कार्रवाई नही कर रहे है। जिससे ऐसा लगता है कि तहसीलदार साहब प्रभारी मंत्री के आदेशो को भी कुछ नही समझते है और न ही उनके आदेशो का पालन करेंगे… सुत्रों की माने और गलियारों की चर्चा है कि तहसीलदार साहब दबी आवाज से कहते नजर आ रहे है ऐसे प्रभारी मंत्री आते है और चले जाते है… और मुफज्जल भी दबी आवाज से कहता नजर आ रहा है प्रभारी मंत्रीजी को भी लक्ष्मी यंत्रों की सौगात मिल जायेगी और वो भी कार्रवाई करने नही देंगे… पैसा फेको तमाशा देखों। अब देखना यह है कि मुफज्जल के अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलता है या फिर नगर की जो आम चर्चा है वो सही है।उक्त मामले को लेकर पटवारी साहब ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है… वहीं हाल ही में जिस मामले को लेकर पटवारी उस मामले की रिपोर्ट पहले ही पटवारी द्वारा रिपोर्ट बना कर पेश कर दी गई थी मगर क्या करें छोटा कर्मचारी ही बली का बकरा बनता है। ऐेसे में सुत्रों का कहना है एसडीएम और तहसीलदार साहब ने मिल कर पटवारी साहब पर कार्रवाई कर डाली… जबकि कार्रवाई तहसीलदार साहब पर होनी थी।
बाकि अगले अंक में…!