अटैच कर्मचारियों पर बाबु की मेहरबानी, प्रभारी मंत्री के आदेशों को भी घोल कर पी गया।

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झाबुआ ओमप्रकाश राठौर

कहते है ना पैसा फेंको और तमाशा देखो। ऐसा ही कुछ हाल जिला स्वास्थ विभाग मै है जहा गांधीछापो के दम प्रभारी मंत्री और कलेक्टर द्वारा आदेशित होने के बाद भी सीएमएचओ कार्यालय मै पदस्थ् एक बाबु तबदला नीति की धज्जियां उड़ाने मै लगा हुआ है। आदेशित कर्मियो को अपने गंतव्य स्थान भेजने की बजाय रोकने मै लगा हुआ है। साहब की नाक के नीचे अटैच कर्मचारी हर रोज अपनी ड्यूटी कर हाजरी रजिस्टर मै अपना हाजरी दर्ज करवा रहें है लेकिन साहब की ऐसी क्या मजबूरी है की साहब की नाक के नीचे सब खेल चलने के बाद भी साहब कोई करवाई नही कर पा रहें है

बाबु खेल रहा सारा खेल

सूत्रों की माने तो सीएमएचओ कार्यालय मै पदस्थ एक बाबु जो सीएमएचओ साहब का चहेता है वो प्रभारी मंत्री और कलेक्टर साहब का आदेश भी उसके सामने कुछ भी नही है सूत्रों का तो ये भी कहना है की साहब को इस बाबु ने अटैच कर्मचारीयो को यही रहने के लिए लेन देन भी कर लिया है और साहब को कहा है की सारा काम मै सेटल कर लुगा अभी किसी को भी अपने स्थान पर भेजने की बजाई उन्हें नजरंदाज कर अनभिज्ञ बन जाओ

इन्हे ही क्यों रोका

सभी कर्मचारियों का अटैचमेंट तोड़ अपनी मुल पदस्थापना पर पहुंचा दिया गया है गोविंद राणावत विजय गणावा अभिषेक तोमर गोविन्द राणावत तेजप्रकाश कहार रामसिह बामनिया आदि ये जिले और अन्य जगत ड्यूटी कर रहें है क्या इन पर अटेचमेंट का नियम लागू नहीं होता। आखिर क्यों निर्देशित होने के बाद भी इन्हे भेजा नही जा रहा है। सूत्रों की माने तो सीएमएचओ साहब के कमाऊ पुत्र यही है जो कागजी मै हेरा फेरी करने मै माहिर है। जो काले कारनामे को कागजों मै इतनी बखूबी से हेरा फेरी करते हे की पता ही नही चलता की कोई भ्रष्टाचार हुआ है। तभी तो सीएमएचओ साहब इनको छोड़ना नही चाह रहें है।अगर इन्हे छोड़ दिया तो आवक कम हो जायेगी

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