आरक्षण होना बाकी लेकिन दावेदारी अभी से शुरू

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@Voice ऑफ झाबुआ     @Voice  ऑफ झाबुआ

शाहिद ज़ैनब

थांदला नगर परिषद का चुनाव कुछ समय बाद होने की संभावना है। नगर परिषद अध्यक्ष इस बार अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाना है। नगर परिषद अध्यक्ष पार्षदो द्वारा चुने जाने के सरकार के फैसले के बाद नगर में दावेदाराें की कतार लगातार लंबी हाे रही है। 1 वार्ड में सात से आठ लोग पार्षद की दावेदारी पेश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे अपनी दावेदारी सीधे कम और साेशल मीडिया के सहारे अधिक कर रहे हैं। उनके चाहने वाले भी उनके अच्छे कामाें का बखान साेशल मीडिया पर कर रहे हैं और उन्हें पार्षद बनने के लिए सर्वगुण संपन्न भी बता रहे हैं।अब तक जिन लाेगाें की दावेदारी सामने आई है, उनमें कुछ सामाजिक संगठन से जुड़े लाेग, भाजपा नेता, कांग्रेस नेता, पूर्व पार्षद, वर्तमान पार्षद, के चुनाव लड़ने की भी चर्चा है। दावेदार अपने-अपने स्तर से अपने वार्डो में सक्रिय हाे गए हैं। राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में किए गए कामाें काे भी साेशल मीडिया के जरिए बताया-दिखाया जा रहा है।ऐसा चुनावी माहौल देखकर लग रहा है कि इस बार पार्षद की दावेदारी अभी और भी परवान चढ़ेगी। शह-मात का खेल हाेगा। हर स्तर पर प्रचार-प्रसार तेज हाेगा। कई सियासी रंग देखने काे मिलेंगे। इसकी तस्वीर अभी से बननी शुरू हाे गई है। हालांकि सब अभी इस इंतजार में हैं कि पहले यह तय हाे जाए कि उनका वार्ड आरक्षित हाेगा या नहीं।फिलहाल तो नगर परिषद का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है लेकिन कई उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं और कुछ लाेग इंतजार कर रहे हैं कि पहले तय हाे जाए कि उनका वार्ड आरक्षित रहेगा या नहीं। इसके बाद अंतिम निर्णय लेंगे।

अजजा महिला आरक्षित वार्ड में उम्मीदवारों की झड़ी लगेगी

नगर परिषद अध्यक्ष इस बार अजजा महिला के लिए आरक्षित है । इसलिए इतना तो साफ ही है कि अगर थांदला नगर परिषद अध्यक्ष कोई बनता है तो वह अनुसूचित जनजाति की महिला ही होगी। इसलिए थांदला नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले 15 वार्डों में जो वार्ड अजजा महिला आरक्षित आएंगे उन्हीं से जीती हुई महिला पार्षद में से ही नगर परिषद अध्यक्ष बनेगा । इसी के चलते अजजा महिला आरक्षित वार्ड में पार्षद उम्मीदवारों की झड़ी लगने की पूरी पूरी संभावनाएं भी है। अजजा महिला आरक्षित वार्ड में जबरदस्त चुनावी घमासान देखने को मिलने की पूरी उम्मीद की जा रही है अब बस इंतजार है तो नगर परिषद के कार्यकाल पूरा होने के बाद आरक्षण प्रक्रिया के पूरा होने का।

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