ये कैसा चुनाव प्रचार …क्या ऐसे दिन आ गए पार्टी के इस क्षेत्र में जब छोटे बच्चो को बिठा दिया दरी पर भाषण सुनने

1319

सुरसुरी☺️……….

भाजपा की अयोध्या कहे जाने वाले कल्याणपूरा में आजकल भाजपा के लिए सब कुछ ठीक ठाक नही है कारण एक ही है पुराने कार्यकर्ता आज घर पर बैठे हुए है ओर नए पदाधिकारी उन्हें सिर्फ चुनाव में याद करते है जिस कारण छेत्र के वरिष्ठ नेताओं का अनुभव और मैनेजमेंट इस चुनाव में देखने को नही मिल रहा है कांग्रेस राज में भी इस छेत्र को भाजपा का अभेद गढ़ बनाने वाले नेताओं की अनदेखी कहि न कही भाजपा को भारी पड़ती दिखाई दे रही है जिस कारण भाजपा को इस बार जिला पंचायत और जनपद सदस्य के रूप में भारी नुकसान हो सकता है ।

बण्डी छाप नेता खालपाल ओर उसके हसीन सपने

कहने को तो कलसिंग भाबर के सारथी कहे जाने वाले खालपाल की माताजी को इस बार जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक 1 से पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है ….यहां पर भाजपा बड़ी गलती दोहराते हुए यहां के स्थानित नेता और वर्षो से पार्टी के लिए जी जान लगाने वाले संघ के स्वयंसेवक मिलनसार व्यक्ति जो कि यहां से जिला वर्तमान में जिलापंचायत सदस्य थे उनका टिकिट काट कर खालपाल की माताजी को टिकिट दिया गया है जो जिस कारण भाजपा के नेता मेगजी अमलियार की पत्नी निर्दलीय मैदान में है मेग्जी जी छेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है साथ ही उनका जनता से सीधा संवाद है जिस कारण मेग्जी के वोटो का गणित है वो भाजपा का गणित जरूर बिगाड़ देगा …ऐसे में यहां भाजपा को बडा नुकसाब होने का अंदेशा है …..ओर भाजपा सहित हिंदूवादी नेता भी यहां पर खुलकर मेग्जी के पक्ष में प्रचार करते हुए दिखाई दे रहे है ।जिस कारण बण्डी छाप नेता खालपाल जो हसीन सपने देख रहा है वो पूर्ण होते हुए नही दिख रहे है …..सपने देखने का अधिकार सबको है सब देख सकते है सपनो का क्या है …..ओर जो सोपना खालपाल देख रहा है वो इतना आसान भी नही है ..?


क्या ऐसे दिन आ गए भाजपा के

जिंहा खालपाल जबसे अपनी माताजी के लिए टिकिट लाया है तबसे खालपाल की नींद हराम सी हो चुकी है रात दिन गांवों में जाना और लोगो को भाषण देना अब खालपाल को क्या बताए कि अभी चुनाव का माहौल तो जमने तो अभी 12 दिन बाकी है वोटिंग के लोग खेतो में काम कर रहे है पर नही खालपाल को तो बस एक ही रट है तो नही माने कल रात फिर निकल लिए एक सभा करने वहां जब गए तो लोग घरों में नही मीले अब सभा कराए तो कैसे आनन फानन में वहां घर घर से बच्चो को निकालकर दरियो पर बिठाया ओर चुनावी भाषण दिया अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे दिन आ गए भाजपा के गढ़ में पार्टी के यहां मैनेजमेंट की भारी कमी या पुराने नेताओ का घर बैठना यह सब पार्टी को सोचने का विषय है …खेर यह तो खालपाल के पास पैसा है जो खर्च कहा करे …दौड़ रही है 8 से 10 गाड़िया ओर निकल पड़े है प्रचार में पर जनता अब पैसा देखकर वोट नही देती उसके लिए जनता का दिल जितना पड़ेगा ….उसके लिए कुछ साल का इंतज़ार खालपाल को जरूर करना था तभी आपके साथ पुराने नेताओ के साथ साथ जनता का साथ होता …..अब चलते है।…जल्द ही आएंगे कुछ और रोचक कहानी लेकर …..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here