सोशल मीडिया और युवा – शिशिर बड़कुल

 

 

(लेखक भाजपा मध्यप्रदेश के सह सोशल मीडिया संयोजक हैं)

 

21 वीं सदी डिजिटल क्रांति का युग है, वर्तमान समय में शायद ही कोई हो जो सोशल मीडिया के बारे में समझ ना रखता हो । एक उम्रदराज समूह की बात करें तो मैं सोशल मीडिया का उपयोग जरूर नहीं करता होगा और नाम जरूर सुन रखा होगा । बहुउद्देशीय उपयोग के लिए सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म का उपयोग हम सभी करते हैं, रोजमर्रा के कार्यों के साथ हम सब की दिनचर्या में सोशल मीडिया एक आवश्यक हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया की जब शुरुआत हुई तो शायद उसका उद्देश्य आपसी जानकारी साझा करने, पुराने मित्रों, पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदारों से मिलने की उपयोगिता रही होगी। बढ़ते समय के साथ व्यापारिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने में भी सोशल मीडिया का बहुतायत उपयोग होने लगा । पर इन सब में अहम बात यह है जो वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर सबसे अधिक हावी है और इसको समझना हमारे लिए आवश्यक भी बन जाता है । वह है विचारधारा की लड़ाई , एक ऐसा वैचारिक द्वंद जो दिन-रात सोशल मीडिया पर चल रहा है। मानव स्वभाव है कि व्यक्ति किसी एक विचार, कई विचारों से सहमत होता है पर आवश्यक हो जाता है कि इसका ध्यान रखे कि मतभेद हो पर मनभेद कभी ना हो ।
आज भारत की जनसंख्या में 60% से अधिक युवा है ,यह वही युवा है जो 100% सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सक्रिय है। दुनिया भर में भारत की संस्कृति सबसे प्राचीन है, कई ऐसी भाषा है जो संस्कृत से बनी है। कई देशों के संत ,महात्माओं और राजाओं ने भारत से शिक्षा दीक्षा ली है , गौरवमयी इतिहास को स्मरण में रखते हुए अपनी बात साफ और स्पष्ट शब्दों में कहना ही भारत के सच्चे युवा की पहचान होनी चाहिए । आज का युवा अपनी बात तो कहता है, पर तथाकथित असामाजिक तत्वों का समूह उनके मन मस्तिष्क पर झूठी ,बनावटी और अनर्गल बातों को थोपने का प्रयास करता है। जेएनयू जैसे कई संस्थानों में शिक्षा की आड़ में लॉर्ड मेकाले की सोच को मनान्तरण के लिए लगातार उपयोग किया जा रहा है । जब हम अपनी बात किसी मंच से साझा करते हैं, तो हमारी बात वहां उपस्थित जनसमुदाय तक पहुंचती है। लेकिन अगर वही बात हम सोशल मीडिया पर कहते हैं और लिखते हैं तो हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते कि हमारी बात कितने लोगों तक जा सकती है। वहीं जब नए भारत की बात करते हैं तब डिजिटल क्रांति के युग में वैचारिक द्वंद के मध्य प्रबलता से अपनी बात रखनी है तो वहां युवाओं को कतई नकार नहीं सकते। स्पष्ट शब्दों में ,संयम के साथ अधिक लोगों तक अपनी बात आम जन तक पहुंचाना है तो इसका सशक्त और सुचारू माध्यम वर्तमान समय में सोशल मीडिया है।
हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं वैसे ही प्रत्येक विषय और प्रत्येक विचार के दो पहलू होते हैं। पर जब सोशल मीडिया की बात आती है तो उपयोगीता के चरम पर सकारात्मक पहलू की बात करते हुए उसे सकारात्मकता की तरफ दिशा देने का कार्य करना चाहिए। जब सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया है तो वहीं दूसरी ओर इसकी ताकत समझनी है तो असहाय व्यक्ति से समझो जिसे कोरोना काल मे सिर्फ एक संदेश से सहायता प्राप्त हुई। उन परिवारों से पूछिए जिनके परिवार के सदस्य दूसरे देशों में फंसे हुए थे और मात्र एक ट्वीट के माध्यम से आज वो अपने परिवारों के साथ है । सरकार की सजगता और सक्रियता देखिए कि सिर्फ एक ट्वीट से समस्या का समाधान होता है । विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में जब राजनीतिक संगठन और सरकारें सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर अपने कार्य सुचारू रूप से कर रहे हैं। तब वही हम देखते हैं कि देश का युवा भी सबसे अधिक समय सोशल मीडिया पर दे रहा है । तब क्यों न हम इन सब का समावेश करके संस्कार और संस्कृति को निहित करके वर्षों पुरानी विचारधारा का संचरण सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर में करें । 21वीं सदी में अगर जागरूक रहना है, सजग रहना है, जानकार बनना है तो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना आवश्यक है । आज भारत के युवा को इस ओर जागृत करने की आवश्यकता है कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ भारतीयता की अवधारणा, भारतीयता की सोच के साथ राष्ट्रवादीता का उदाहरण भी प्रस्तुत करना होगा । मताधिकार की बात है तो वोट सबको करना होता है, पर सरकारों के कामों की, राजनीतिक दलों की बात कोई नहीं करता। जिसकी आवाज तेज होती है हर कोई उसके पीछे भेड़ चाल में मूक समर्थन देता है । पर आवश्यक है कि हम विचारों की ऑनलाइन संगोष्ठी में शामिल हो, विवेकपूर्ण अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखें। अच्छे कार्यों की चर्चा मुक्त कंठ से हो । वर्तमान समय मे सोशल मीडिया सिर्फ फोटो – वीडियो डालने तक सीमित ना हो इस दिशा में विचार करने की आवश्यकता है ।
डिजिटल क्रांति के युग में हर किसी की सोशल नेटवर्किंग साइट पर बनी प्रोफाइल डिजिटल बायोडाटा होती है । हमारी आईडी हमारा चरित्र प्रमाण पत्र होती है। जितना प्रमाणिक और तथ्यात्मक बात हम करते हैं उतनी सच्चाई हमारी पहचान होती है ।किसी एक पक्ष की बात ना करें पर यह जरूरी हो जाता है कि बात कोई भी हो हमारे लिए राष्ट्र सदैव प्रथम होना चाहिए। साथ ही इस पर भी विचार करे कि हमारे आंतरिक विषयों पर विदेशी ताकतें क्यों बात करते हैं। वह कौन लोग हैं जिन्हें देश की एकता अखंडता से परेशानी है ! वह कौन लोग हैं जिन्हें देश की शांति से परेशानी है ! हम तय करेंगे हमें किस तरफ रह कर अपनी बात रखनी है ,देश तोड़ने वालों के साथ या देश को परिवार मानने वालों के साथ ! आतंकियों और दंगाइयों के हित चाहने वालों के साथ या इन ताकतों को दमन करने वालों के साथ । बुद्धि से विवेक और विवेक से विचार आता है, इसलिए सोशल मीडिया पर एक शब्द भी लिखने से पहले विचार जरूर करें कि हम पहले भारत के नागरिक और उस दिशा में हमारी क्या जिम्मेदारी है। भारत देश विचारों की रक्षा के लिए जाना जाता है ।परिवर्तन की ललक, अदम्य साहस और स्पष्ट संकल्प लेने की चाहत का नाम है युवावस्था। दुनिया में कोई भी विचारधारा बिना युवा शक्ति के सशक्त नहीं बन सकती । युवाओं की बात करना इसलिए भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि किसी निर्माण और विध्वंश की नींव युवाओं के दम पर रखी जाती है ।और सोशल मीडिया के युग में जब हर हाथ पत्रकार है, तो जरूरी है कि हम अपने नैतिक मूल्य के विकास और रखरखाव की नींव आज से ही रखें ।

 

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