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कलेक्टर की जांच में मेडिकल स्टोर के अभिलेख गायब,अब बामनिया के सभी मेडिकल स्टोर पर उठे सवाल..। फार्मासिस्ट पंजीयन के दस्तावेज नहीं मिले तो कार्यवाही के निर्देश “एक मेडिकल की जांच से क्या होगा,पूरे बामनिया में हो जांच…? क्या नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं मेडिकल स्टोर…? जिम्मेदार विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में..।

सुनिल डामर

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के निरीक्षण ने बामनिया में संचालित मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने स्थित शक्ति मेडिकोज प्लस का निरीक्षण कर औषधियों के विक्रय संबंधी अभिलेखों की जांच की। इस दौरान अनुसूची-एक्स (Schedule-X) के अंतर्गत विक्रय की गई दवाइयों का रिकॉर्ड एवं निरीक्षण पुस्तिका (Inspection Book) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, लेकिन ये अभिलेख मौके पर उपलब्ध नहीं पाए गए। इतना ही नहीं, मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट के पंजीयन संबंधी अभिलेख भी उपलब्ध नहीं मिलने पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर के इस निरीक्षण के बाद अब बामनिया में संचालित अन्य मेडिकल स्टोर भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

एक की जांच हुई तो सवाल -बाकी मेडिकल स्टोरों की जांच कब..?

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या बामनिया में संचालित सभी मेडिकल स्टोर निर्धारित नियमों और फार्मासिस्ट की उपस्थिति संबंधी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं..? स्थानीय समाचार माध्यमों में पूर्व में भी ऐसे आरोपों और शिकायतों से संबंधित खबरें प्रकाशित होती रही हैं कि कुछ मेडिकल स्टोरों पर प्रशिक्षित एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपलब्धता को लेकर सवाल हैं। अब कलेक्टर के निरीक्षण में एक मेडिकल स्टोर के अभिलेख मौके पर उपलब्ध नहीं मिलने के बाद लोगों की मांग है कि सिर्फ एक-दो दुकानों तक सीमित न रहकर बामनिया के सभी मेडिकल स्टोरों की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की जाए।

दस्तावेज वैध हैं तो सामने क्यों नहीं आए…?

कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सभी दस्तावेज नियमानुसार हैं तो जांच के दौरान उन्हें प्रस्तुत क्यों नहीं किया जा सका? वहीं यदि किसी मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट के पंजीयन, दवा बिक्री के रिकॉर्ड अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेजों को लेकर कोई कमी है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और अब तक संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच क्यों नहीं की गई..? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग की जांच और कार्यवाही से ही सामने आएगा।

संरक्षण किसका..?उठ रही है निष्पक्ष जांच की मांग…!

यदि किसी मेडिकल स्टोर में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित दुकान को संचालन की अनुमति कैसे मिली और नियमित निरीक्षण के दौरान ऐसी कमियां सामने क्यों नहीं आईं..?

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल स्टोर जैसी संवेदनशील गतिविधि में नियमों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि मामला सीधे आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए जांच केवल कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक स्थिति की भी पड़ताल होनी चाहिए।

अब देखना यह-कलेक्टर के आदेश पर कितनी दूर तक पहुंचेगी जांच…?

कलेक्टर द्वारा कार्यवाही के निर्देश दिए जाने के बाद अब निगाहें संबंधित विभाग पर हैं। सवाल यह है कि क्या जांच केवल निरीक्षण किए गए मेडिकल स्टोर तक सीमित रहेगी या बामनिया के सभी मेडिकल स्टोरों की व्यापक जांच होगी…? क्या प्रत्येक मेडिकल स्टोर पर पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपलब्धता,लाइसेंस,दवा विक्रय रजिस्टर, अनुसूची-एच/एच1 एवं अनुसूची-एक्स दवाओं के रिकॉर्ड और निरीक्षण पुस्तिका सहित तमाम आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी…?

जनता की मांग-स्वास्थ्य से जुड़े मामले में हो “नो समझौता”

बामनिया सहित क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद सभी मेडिकल स्टोरों का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार कार्यवाही की जाए। अब देखना दिलचस्प होगा कि कलेक्टर के औचक निरीक्षण के बाद विभागीय जांच कितनी गंभीरता से आगे बढ़ती है सिर्फ एक मेडिकल स्टोर तक या पूरे बामनिया के मेडिकल कारोबार तक…?

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