दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा में मंडी कर्मचारी अय्यूब मकरानी का बिना बिल्टी बिल के कृषि उपज को गुजरात दाहोद मंडी में भेजने के कांड के बाद एक और कांड उजागर हो गया है सूत्रों के हवाले से खबर है कि मंडी में इनकी निगरानी में कपास स्थानीय व्यापारी चौहत्तर सो रुपए पांच सो में एक क्विंटल रुपए में खरीदा जा रहा है और यही व्यापारी वहीं कपास बहत्तर सो रुपए क्विंटल में बाहर से आने वाले थोक व्यापारियों को कैसे बेच रहे है ।क्या इन व्यापारियों में किसी दानवीर की आत्मा शामिल हो गई है वो महंगे भाव में कपास खरीद कर सस्ते भाव में बेच रहे है और खुद इतना घाटा कैसे उठा रहे है उसकी भी बड़ी जानकरि सूत्रों से पता चली है कि अय्यूब मकरानी की निगरानी में मंडी में नीलामी हो रही है उन तोल काटो में भारी हेरा फेरो की जाकर उनमें इतनी बड़ी गड़बड़ी है कि किसानों को एक गठरी में लगभग 10से 15 किलो कपास कम वजन बताया जाता है और कम भी लिखा जाता है व्यापारियों के मजदूर भी अचानक गठरियों को काटो पर रखते समय भी ऊपर उठाकर रखते है जिससे भी कपास का वजन कम निकलता है । जिला कलेक्टर को मंडी का निरीक्षण कर उसमें शासकीय मानकों वाले टोल काटे लगवाना चाहिए क्योंकि मंडी में हर व्यापारी अपने अपने तोल काटे लेकर तोल कर कपास और अन्य कृषि उपज खरीदते है ।अय्यूब मकरानी को तुरंत नौकरी से बाहर करे या निलंबित कर इसकी संपत्ति की भी जांच करवानी चाहिए और इनकी इतनी संपत्ति कहा से आई है ।क्या मंडी के भी अधिकारियों की मिली भगत है जो किसान को इतना बड़ा चुना इतने सालों से व्यापारी और मंडी कर्मचारी मिलकर लगा रहे है ।।क्या कोई भी निगरानी टीम आज तक इतनी बड़ी गड़बड़ी पकड़ नहीं पाई साथ ही यह हेरा फेरी कई वर्षों से की जाती रही होगी जिससे कितने वर्षों से मंडी के अलावा अनाज खरीदी करने वाले व्यापारी गरीब किसान को लगातार कई सालों से चुना लगा रहे है।व्यापारियों की भी संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए जिन जिन का कृषि उपज खरीदी का लाइसेंस है ।।।साथ ही क्षेत्रीय विधायक और क्षेत्रीय सांसद को भी इस बड़े झोलझाल का संज्ञान लेकर किसानों को न्याय दिलवाना चाहिए मंडी रिकॉर्ड के अनुसार दर्ज बिक्री के आधार पर की गई गड़बड़ी और जितने किलो अतिरिक्त कपास के और अन्य फसलों की कीमत का भुगतान करवाना चाहिए ।