आलीराजपुर। आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। 22 दिसंबर को सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कथित राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोसायटी के एक सेल्समैन से दिनदहाड़े 50 बोरी खाद की लूट को रोकने पर कथित आदतन अपराधी इंदर सिंह चौहान व उसके साथियों ने बेरहमी से मारपीट की। यह घटना सोसायटी परिसर/सिनेमा चौराहा क्षेत्र में हुई, जहाँ लाठी-डंडों से हमला किया गया, जान से मारने की धमकी दी गई और जबरन माल ले जाने का प्रयास किया गया। स्थानीय नागरिकों के हस्तक्षेप से बड़ी अनहोनी टल सकी।
एफआईआर में देरी, धाराएँ कमजोर करने के आरोप पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के कई घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई और उसमें शासकीय कार्य में बाधा जैसी गंभीर धाराओं को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया। इससे यह संदेह और गहराता है कि आरोपियों को बचाने का प्रयास किया गया।
‘आदतन अपराधी’ और निगरानी सूची पर सवाल
स्थानीय सामाजिक संगठनों के अनुसार, ग्राम डोबालझिरी निवासी इंदर सिंह चौहान एक आदतन अपराधी है। आरोप है कि उसके परिवार के अन्य सदस्य—भुवान सिंह चौहान व नागर सिंह चौहान—पर भी विभिन्न जिलों व राज्यों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। नागरिकों का कहना है कि यह परिवार पूर्व में थाना क्षेत्र की गुंडा/निगरानी सूची में भी शामिल रहा है।
राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोप
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप पीड़ितों और आम नागरिकों में भय का माहौल है और लोग थाने जाने से भी कतराते हैं। आदिवासी विकास परिषद का कड़ा रुख
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “आदिवासी बहुल जिले में दिनदहाड़े लूट और मारपीट बेहद गंभीर मामला है। एफआईआर में देरी और कमजोर धाराएँ यह संकेत देती हैं कि कहीं न कहीं अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भोपाल में विधानसभा भवन के सामने बड़ा आंदोलन किया जाएगा।” उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से जिले की कानून-व्यवस्था पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
जनता की प्रमुख मांगें
• आदतन अपराधियों पर कठोर धाराओं में निष्पक्ष कार्रवाई
• राजनीतिक दबाव से मुक्त स्वतंत्र जांच
• गुंडा/निगरानी सूची की सार्वजनिक समीक्षा
• पीड़ितों की सुरक्षा और त्वरित न्याय
यह घटना केवल एक एफआईआर तक सीमित मामला नहीं, बल्कि आदिवासी बहुल जिले में सुरक्षा, न्याय और शासन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुकी है।