झाबुआ डेस्क
झाबुआ। भारत सरकार द्वारा पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से देश के अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्यों को सक्रिय किया जा रहा है। इसी क्रम में पेसा कानून के उद्देश्यों को ग्राम सभाओं के माध्यम से आदिवासी समाज तक पहुँचाने तथा उन्हें स्वशासन के अधिकारों से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पेसा कानून के तहत आदिवासियों की पारंपरिक रूढ़ी-प्रथाओं, सांस्कृतिक विरासत एवं स्वशासन की मूल भावना को सुरक्षित एवं सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 15 नवंबर 2022 को पेसा नियम लागू किए गए, जिसके बाद अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार प्राप्त हुए हैं।

पेसा नियमों के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं के अनुरूप छोटे-मोटे विवादों का समाधान करने के साथ-साथ जल, जंगल एवं जमीन से जुड़े अधिकारों का संरक्षण कर रही हैं। इसका सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के पेसा महोत्सव कार्यक्रम में झाबुआ जिले से कुल 08 प्रतिभागी सहभागिता करेंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत झाबुआ श्री जितेंद्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में पेसा जिला समन्वयक गौरसिंह कटारा को जिले का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
महोत्सव में झाबुआ जिले से दो महिला सरपंच— श्रीमती कलां शैतान भूरिया (ग्राम पंचायत झौंसर) एवं श्रीमती जमुना गणपतसिंह ढाकिया (ग्राम पंचायत चुड़ेली) भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त महिला मैराथन दौड़ में सुश्री ललिता जमरा एवं सुश्री बद्दी मेड़ा, पुरुष मैराथन दौड़ में श्री दिलीप भूरिया एवं श्री बन्टु परमार, तथा तीरंदाजी प्रतियोगिता में श्री जवानसिंह भूरिया जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह सहभागिता झाबुआ जिले के लिए गौरव का विषय है तथा पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी स्वशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।