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अद्भुत आस्था और अनन्य विश्वास के साथ श्री सांवरिया मित्र मंडल, पेटलावद की प्रथम ऐतिहासिक मंडफिया यात्रा भव्य रूप से संपन्न* 

रिपोर्टर-सुनील खोड़े

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पेटलावद नगर में धार्मिक उत्साह और गहन आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम तब देखने को मिला, जब श्री सांवरिया मित्र मंडल, पेटलावद द्वारा आयोजित प्रथम एक दिवसीय ऐतिहासिक श्री सांवरिया सेठ मंडफिया यात्रा हजारों भावनाओं और सौहार्द के वातावरण में सफलता पूर्वक संपन्न हुई। इस यात्रा में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से 101 श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और निष्ठा के साथ भाग लिया।

भक्ति और विधि-विधान के साथ हुआ यात्रा का शुभारंभ

मंगलवार सुबह 5 बजे यात्रा का शुभारंभ नगर के प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से किया गया। यहां उपस्थित भक्तों ने सर्वप्रथम ध्वज पूजन, वाहन पूजन और श्रीफल चढ़ाकर भगवान महादेव का आशीर्वाद लिया। मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के वातावरण में यात्रा का शुभारंभ अत्यंत आध्यात्मिक और भावपूर्ण रहा। दो बसों में सवार भक्तजन यात्रा स्थल की ओर प्रस्थान हुए।

 मंडफिया मंदिर में पहुंचकर भक्त हुए भाव-विभोर

यात्रा का पहला पड़ाव प्रसिद्ध मंडफिया स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर रहा। मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर बसों को रोककर सभी भक्तों ने ढोल-ढमाकों, मंजीरों की धुन और “जय सांवरिया सेठ” के गगनभेदी जयकारों के साथ नृत्य करते हुए पैदल यात्रा प्रारंभ की।

सभी श्रद्धालु छप्पन भोग का नैवेद्य लेकर नाचते-गाते मंदिर तक पहुंचे। मंदिर में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात प्रसादी वितरण हुआ और नगर से लाए गए ध्वज भगवान सांवरिया सेठ को समर्पित किए गए। इस दौरान भक्तों की आंखों में भक्ति और आनंद की चमक स्पष्ट झलक रही थी।

 भादसौड़ा गांव में किया भगवान की एक दिव्य मूर्ति का दर्शन

मंडफिया धाम के बाद यात्रा भादसौड़ा गांव पहुंची, जहां भगवान सांवरिया सेठ की तीन चमत्कारी मूर्तियों में से एक मंदिर में विराजित है। यहां पहुंचकर भक्तों ने दर्शन किए और स्थानीय भक्तों द्वारा किए जा रहे कीर्तन के सुरों पर झूम उठे। भक्तों ने इस स्थान को अत्यंत शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण अनुभव किया।

 प्राकट्य स्थल पर हुए दिव्य दर्शन—भक्ति भाव का चरम

इसके बाद यात्रा भगवान सांवरिया सेठ के प्राकट्य स्थल की ओर बढ़ी। यहां उपस्थित तीसरी दिव्य मूर्ति के दर्शन कर सभी भक्त प्रभु प्रेम में सराबोर हो गए। कई श्रद्धालु भावुक भी हुए और इस पवित्र स्थल पर ध्यान लगाकर आत्मिक शांति का अनुभव किया। प्रांगण में स्थित हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया तथा स्तुति-भजन गाए। पूरे वातावरण में भक्ति, ऊर्जा और दिव्यता का समावेश वातावरण को संगीतमय बना रहा।

 भक्तों की मांग— हर वर्ष निकले ऐसी यात्रा

पूरी यात्रा के दौरान सभी भक्तों ने एकता, भक्ति और उल्लास का अद्भुत अनुभव प्राप्त किया। लौटते समय भक्तों ने कहा कि इस तरह की धार्मिक यात्रा न केवल भक्ति को प्रबल करती है, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव और सामूहिक आस्था को भी मजबूत करती है। भक्तों की मांग है कि इस प्रकार की भव्य यात्रा प्रत्येक वर्ष अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकें और सामूहिक भक्ति की ऊर्जा का अनुभव कर सकें। श्री सांवरिया मित्र मंडल द्वारा आयोजित यह प्रथम यात्रा पेटलावद की धार्मिक परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए नगर के भक्तों के लिए अविस्मरणीय स्मृति बन गई।

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