सुनिल डामर
एक ओर प्रदेश सरकार बच्चों को निःशुल्क हर वह सुविधा मुहैया कराने का दावा कर रही है। जिससे कि बच्चे सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचे,वही करोड़ों रुपए शिक्षा विभाग में बच्चों की सुविधाओं के लिए प्रतिवर्ष बजट आवंटित किया जाता है।लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुलती हुए हमेशा नजर आती है।ग्रामीण अंचलों में सही से देख-रेख वह सतत मॉनिटरिंग के अभाव में व वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता है।जिसकी वजह से ग्रामीण अंचलों की स्कूलों में आज भी कई जगह बच्चे परेशानियों से गुजरते हुए देखे जा सकते हैं।वहीं जिन जनशिक्षक (सिएसी) का दायित्व है स्कूलों में समय पर निरीक्षण करना रहता लेकिन वह भी लापरवाह बने हुए हैं। कीचड़ भरे रास्ते से बच्चे निकलते हुए स्कूल में शिक्षा ग्रहण के लिए पहुंचते है।फिर भी बच्चों की समस्या ग्राम पंचायत को नहीं दिख रही है ना ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को, प्रादेशिक युवा आवाज़ को मिली कुछ ऐसी ही ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुकड़ीपाड़ा संकुल के अंतर्गत आने वाले परवाड़ा ग्राम पंचायत के लिमड़ीफलिया व नाका फलिया में भारी अनियमितताएं सामने आई है।बारिश हो रही थी प्रादेशिक युवा आवाज के प्रतिनिधी मौके पर लीमडीफलिया स्कूल पहुंचे तो वहां स्कूल की छत से पानी टपक रहा है। तो बच्चे अतिरिक्त कक्ष एक बना रखा उसमें एक से पांचवी तक बच्चे बिठा रखे हैं। शाला में टोटल उपस्थित 85 है। जबकि मौके पर 75 बच्चे स्कूल में पाए गए दो शिक्षक यहां पदस्थ है,मौके पर शिक्षक हमें मौजूद मिले जबकि शिक्षिका हमारे पहुंचने के बाद 1 बजे स्कूल पर पहुंची बताते हैं,एक शिक्षक बाजना से अप डाउन करता है तो दूसरी शिक्षिका रतलाम से अप डाउन करती है। अब यह किस तरह से बच्चों को शैक्षणिक व्यवस्था में पढ़ाते होंगे सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। शिक्षक ने बताया कि मेंडम छुट्टी पर थी आज अचानक एक बजे आ गए मेडम ने बताया कि मैं मेडिकल लेकर छुट्टी पर थी आज आई हूं एक बजे मेंडम पहुंचे इस पर मेंडम ने कोई भी जवाब नहीं दिया वही मध्यान्ह भोजन की बात करें तो ज्योति बचत महिला समूह द्वारा मध्यान्ह भोजन दिया जाता लिमड़ी फलीया में लेकिन वहां मीनू अनुसार बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा था।मंगलवार के दिन मीनू अनुसार इनको खीर-पूड़ी हलवा आलू और टमाटर की सब्जी आदि बनाना था।लेकिन वहां पर सिर्फ दाल और पूड़ी बनाई गई जबकि खीर तो थी भी नहीं वहां पदस्थ शिक्षक से पूछा गया तो कहा कि समूह वाले दूध आज बारिश की वजह से नहीं लाए होंगे।इसलिए नहीं बनाया गया वही रसोयन ने बताया कि हमें जैसा समूह द्वारा सामान दिया जाता है वैसा हम बना देते हैं,तो वही स्कूल की छत से पानी टपकता हुआ जर्जर स्कूल दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि भवन को जमींदोज करके नया भवन यहां बनवाया जाए।

यहां भी काफ़ी अनियमितताएं आई गई।
हमारी टीम जैसे ही नाका फलिया परवाड़ा में पहुंची तो कच्चे रास्ते होते हुए स्कूल का निरीक्षण किया गया।जहां कई अनियमितताएं वहां भी हमें मिली स्कूल में एक अतिथि के साथ दो नियमित शिक्षक नाका फलिया में पदस्थ हैं।वहां भी दो स्कूल के भवन काफी जर्जर हो रहे हैं। जिनकी छत से पानी टपक रहा है। संस्था प्रभारी चंदन चंद्रावत का कहना है कि हमने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में कई बार दे चुके हैं। लेकिन फिर भी यहां कोई नया भवन नहीं बनाया गया है। हम एक कमरे में ही 72 बच्चों को एक साथ बिठा रहे है। वही जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो बच्चे हाथ में थालियां लिए भोजन का इंतजार करते हुए देखे इसके बाद थोड़ी देर में समूह द्वारा उनको आलू प्याज की सब्जी दी गई। वह पूड़ी वितरण की गई लेकिन वहां भी खीर नहीं बनाई गई थी। संस्था प्रमुख से पुछा तो कहा कि कीचड़ अधिक थी इसकी वजह से दूध नहीं ला पाए समूह वाले और नियमित मीनू अनुसार भोजन हमारी स्कूल में मिलता है।अब संस्था प्रमुख समूह का बचाव करते हुए नजर आए हैं। वही कहने लगे कि हमारे स्कूल नियमित खुलता है। बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाया जा रहा है। स्कूल के दो कमरों पर पानी टपकता है। जहां बच्चे नहीं बिठाए जा रहे हैं।

घटिया किस्म कि हैंडवॉश यूनिट
नाका फलिया में जल जीवन जल मिशन के तहत हैंड वॉश यूनिट बनाई गई थी। जानकारी रखने वाले बताते हैं कि शाला प्रबंधन समिति के खाते में हैंड वॉश यूनिट के राशी डली थी जिसमें एक पानी पीने के लिए स्टैंड बनाने के साथ नल व टंकी आदि ठेकेदार के माध्यम से कार्य किया गया था लेकिन टंकियां तो वहां धरातल पर नीचे पाई गई वही हैंड वॉश यूनिट में प्लास्टर व टाइल्स नहीं लगाई गई। जिम्मेदार इंजीनियर ने लापरवाही करते हुए अनापति प्रमाण पत्र नाका फलिया स्कूल को दे दिया गया।जबकि वहां हैंड वॉश यूनिट बिल्कुल साफ नल के साथ चालू स्थिति में होना चाहिए लेकिन ऐसा नाका फलिया स्कूल में नहीं देखा गया।इसी वजह से समझा जा सकता है कि किस तरह से ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। हमारी रिपोर्ट एक तरफ प्रदेश सरकार बच्चों को हर सुविधा मुहैया करने का दावा तो करती है लेकिन धरातल पर योजना बनने के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।जिम्मेदार शिक्षा विभाग के अधिकारी जिले सहित ब्लॉक लेवल पर खाना पूर्ति करके मामले में स्कूल संचालकों को क्लीन चिट दी जाती है।जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल में भारी अनियमितताएं है।

शौचालय की हालत बद से बद्तर, बच्चे बाहर सोच करने वह बाथरूम करने जाते
नाका फलिया परवाड़ा में वर्ष 2025- 26 में शाला हेतु बालीका शौचालय मरम्मत कार्य हेतु राहत राशि दी गई थी। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत बालक और बालिका में शौचालय की राशि 20000 आवंटित की गई थी।जिसका पत्र क्रमांक 2025/2214 भोपाल दिनांक 16 /5 /2025 को पत्र के परिपालन में लेख है। की समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2025-26 में अक्रियाशील बालक एवं बालिका शौचालय को क्रियाशील बनाए जाने के लिए इकाई की लागत 20000 के मान से शौचालय मरमत हेत चयनित शालाओं में शाला प्रबंधन समिति को राशि स्वीकृत की जाकर खाते में जमा की जा चुकी है,पत्र जारी हुआ मुख्य सचिव महोदय मध्य प्रदेश शासन द्वारा बालक एवं बालिकाओं के शौचालय मरम्मत कार्य समय सीमा में पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं।उक्त समय सीमा में पूर्ण किए जाने हेतु निर्देशित किया गया था जिसमें निर्देश दिए गए थे कि 1 जुलाई 2025 को पूर्व सभी शाला भवन में लघु निर्माण विशेष मरम्मत शौचालय सुधार कार्य शौचालय में रनिंग वाटर रंगाई, पुताई साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।शौचालय को पूरा नया बनाने के साथ उसमें टूटी हुई शीट के स्थान पर नवीन शीट लगाना आदि पत्र में संदर्भ में दे रखा है।लेकिन नाका फलिया परवाड़ा में अभी तक बालिका शौचालय पूर्ण नहीं हो पाया राज्य शासन ने इनको पहले ही सचेत करके 1 जुलाई 2025 पूर्व सभी शाला भवनों में लघु निर्माण करने के आदेश जारी किए गए थे लेकिन फिर भी नाका फलिया परवाड़ा में शौचालय का पूर्ण निर्माण नहीं किया गया ना ही मरम्मत किया गया जिसकी वजह से वहां के बच्चे अभी भी बाहर शौच के लिए जाने को मजबूर है। संस्था प्रमुख चंद्रन चंद्रावत से जब चर्चा की तो उन्होंने बताया कि सीमेंट रेत सब पड़ा है।लेकिन हमें मिस्त्री नहीं मिल रहे गड्डा भी खुदवा दिया है।लेकिन मिस्त्री समय पर नहीं मिल रहा तो हम क्या करें जबकि इनको बारिश से पहले पूरा शौचालय बनाना था।लेकिन ऐसा वहां कुछ भी हमें दिखाई नहीं दिया गया जिसकी वजह से गड्ढा सिर्फ सौचालय का खोद रखा है जबकि इनको गर्मी में ही पूर्ण करके विभाग को अवगत करवाना था लेकिन यहां भी इन्होंने सिर्फ रस्म निभा कर स्कूल में खानापूर्ति की गई इसकी वजह से आज बच्चों को शौच व बाथरूम करने में परेशानियों से का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान जो शौचालय है वह काफी जर्जर हो चुका है। तो उसमें काफी गंदगी पड़ी हुई है।